पीलीभीत। बरखेड़ा क्षेत्र में पिछले एक माह से दहशत का कारण बने तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। शासन से अनुमति मिलने के बाद सोमवार को बर्रामऊ गांव के समीप आबादी से करीब 400 मीटर दूर तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाया गया। पिंजड़े में चारे के तौर पर बकरी भी बांधी गई है। साथ ही तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और 24 घंटे की निगरानी के लिए टीमों की तैनाती की गई है।
एक माह से गांव के आसपास दिख रहा था तेंदुआ
बरखेड़ा क्षेत्र के गांव बर्रामऊ के आसपास बीते 9 दिसंबर से तेंदुए की लगातार चहलकदमी देखी जा रही थी। तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया था और किसानों ने खेतों की ओर जाना भी बंद कर दिया था। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान तेंदुए के साथ दो शावक भी देखे गए थे। वन विभाग की टीमों ने खेतों में तेंदुए के पगमार्क मिलने के बाद चार कैमरा ट्रैप लगाकर निगरानी शुरू की थी।
डब्ल्यूटीआई के एनाइडर भी लगाए गए थे
17 दिसंबर को तेंदुआ गांव के इर्द-गिर्द घूमता नजर आया, जिसके बाद उसकी बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए डब्ल्यूटीआई की ओर से दो एनाइडर (ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम) भी लगाए गए थे। हालांकि इसके बाद तेंदुए की चहलकदमी कम हो गई और लंबे समय तक मौजूदगी न मिलने पर एनाइडर और कैमरा ट्रैप हटा लिए गए थे। तब यह माना जा रहा था कि तेंदुआ जंगल की ओर लौट गया है।
शुक्रवार रात फिर दी दस्तक, ग्रामीणों में दहशत
बीते शुक्रवार की रात तेंदुए ने बर्रामऊ गांव में फिर दस्तक देकर दहशत फैला दी। ग्रामीणों के अनुसार तेंदुए ने गांव में कुत्ते के बच्चों को अपना शिकार बनाया। अगली सुबह खलिहान में तेंदुए के ताजा पगमार्क मिलने से हड़कंप मच गया। इस पर ग्रामीणों ने वन विभाग पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की।
कैमरा ट्रैप में कैद हुआ तेंदुआ, पिंजड़ा लगाया गया
शनिवार को वन एवं वन्यजीव प्रभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए के ताजा पगमार्क ट्रेस किए और क्षेत्र में दोबारा कैमरा ट्रैप लगाए। सोमवार को कैमरा ट्रैप की जांच में तेंदुआ नजर आया, जिसके बाद डीएफओ भरत कुमार डीके के निर्देश पर बीसलपुर रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी रोहित जोशी टीम के साथ पिंजड़ा लेकर गांव पहुंचे। सोमवार शाम पिंजड़ा स्थापित कर दिया गया और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं।
“आबादी क्षेत्र के आसपास तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए शासन से रेस्क्यू की अनुमति मांगी गई थी। अनुमति मिलते ही तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाया गया है। कैमरा ट्रैप के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है और टीमों को 24 घंटे तैनात किया गया है।”
— भरत कुमार डीके , डिप्टी डायरेक्टर सामाजिक वानिकी पीलीभीत

