पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत के सर्जरी विभाग ने एक ऐसा जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसने न केवल चिकित्सकों की विशेषज्ञता को प्रमाणित किया, बल्कि मरीज के जीवन को संभावित जोखिम से सुरक्षित भी किया। थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के रहने वाले 45 वर्षीय एक पुरुष को गोली लगने के बाद अत्यंत गंभीर स्थिति में महाविद्यालय के आपातकालीन विभाग में लाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने त्वरित उपचार प्रक्रिया प्रारंभ की।
प्रवेश घाव स्पष्ट, निकास घाव नदारद—प्रारंभिक जांच में उलझन
मरीज को भर्ती किए जाने पर चिकित्सकों ने पाया कि गोली दायीं कुहनी में प्रवेश कर चुकी थी, लेकिन शरीर में उसके निकास का कोई निशान नहीं था। यह स्थिति चिकित्सा दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि बिना निकास घाव के गोली का शरीर के भीतर मार्ग पता लगाना कठिन होता है। शुरुआती जांचों में गोली का लोकेशन निर्धारित नहीं हो सका, जिससे मरीज के शरीर में आंतरिक क्षति की संभावना बढ़ गई थी। ऐसी अवस्था में समय पर निर्णय लेना मरीज की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।
एक्स-रे में उजागर हुआ सच—गोली कंधे में जाकर फंसी
स्थिति स्पष्ट करने के लिए हड्डी रोग विभाग की सलाह पर एक्स-रे परीक्षण कराया गया। परीक्षण में यह पता चला कि गोली हाथ से ऊपर की दिशा में बढ़ते हुए दाएँ कंधे के भीतर जाकर फंस गई थी। यह स्थान अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि कंधे के भीतर नसों, धमनियों और जोड़ संरचनाओं का जटिल जाल होता है। यदि गोली वहीं बनी रहती, तो स्थायी विकलांगता, अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण या जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता था।
सर्जरी विभाग ने संभाली कमान—विशेष तैयारी के बाद ऑपरेशन शुरू
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत ऑपरेशन थिएटर में ले जाने का निर्णय लिया गया। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. जगदम्बा शरण के नेतृत्व में एक अनुभवी टीम गठित की गई, जिसने ऑपरेशन से पूर्व आवश्यक परीक्षण, एनेस्थीसिया मूल्यांकन और संभावित जोखिमों का विश्लेषण किया। ऑपरेशन के दौरान प्राथमिक लक्ष्य था—गोली को सुरक्षित रूप से निकालना तथा आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं को क्षति से बचाना। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल थी।
डॉ. जगदम्बा शरण का बयान—“नसों और धमनियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता”
सर्जरी पूर्ण होने के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. शरण ने बताया—
“मरीज की हालत गंभीर थी और गोली कंधे के भीतर गहराई में फंसी हुई थी, जिससे सर्जरी की चुनौती बढ़ गई थी। ऑपरेशन के दौरान नसों और धमनियों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुँचे, यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। पूरी टीम ने अत्यंत समन्वित ढंग से कार्य करते हुए यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की।”
मरीज पूरी तरह सुरक्षित, स्वस्थ होकर डिस्चार्ज
सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति धीरे-धीरे स्थिर हुई। चिकित्सकों ने संक्रमण नियंत्रण, दर्द प्रबंधन और गतिशीलता मूल्यांकन के पश्चात मरीज को स्वस्थ घोषित किया और उन्हें घर भेज दिया गया। मरीज और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने सराहा चिकित्सा क्षमता
प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने इस उपलब्धि पर कहा—
“हमारा संस्थान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उच्च-स्तरीय, त्वरित और सुरक्षित चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफल ऑपरेशन न केवल सर्जरी विभाग की दक्षता को प्रदर्शित करता है, बल्कि महाविद्यालय की उन्नत चिकित्सा क्षमता का भी प्रतीक है।”
संस्थान की प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी
इस जटिल ऑपरेशन की सफलता ने जिले में गंभीर आपात स्थितियों के उपचार के लिए इस संस्थान की विश्वसनीयता और बढ़ा दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी उपलब्धियाँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर हुए बिना उन्नत उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैँ।

