(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। पीलीभीत वन एवं वन्यजीव प्रभाग द्वारा बीसलपुर क्षेत्र स्थित गौहनिया आर्द्रभूमि को उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “वन डिस्ट्रिक्ट, वन वेटलैंड” के अंतर्गत प्रस्तावित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
लगभग 17 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली गौहनिया आर्द्रभूमि एक महत्वपूर्ण मीठे पानी का पारिस्थितिक तंत्र है। यहां एवं इसके आसपास अब तक 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें सारस क्रेन, सुरखाब (रड्डी शेलडक), इंडियन पोंड हेरॉन, बगुले, किंगफिशर तथा अनेक प्रवासी जलपक्षी प्रमुख हैं। यह स्थल सारस क्रेन के बड़े समूह के लिए भी जाना जाता है, जहां पिछली गणना में लगभग 37 वयस्क सारस दर्ज किए गए थे।
ईको डेवलपमेंट काउंसिल के गठन का प्रस्ताव
सतत प्रबंधन और स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर ईको डेवलपमेंट काउंसिल गठित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा दिया जाएगा, संरक्षण एवं स्वच्छता हेतु प्रहरी/चौकीदारों की तैनाती की जाएगी तथा कैंटीन और आगंतुक सहायता केंद्र जैसी लघु सामुदायिक सुविधाएं विकसित कर स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसर सृजित किए जाएंगे।
सोलर पंप, नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग प्वाइंट होंगे विकसित
पक्षियों के लिए वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रभाग द्वारा 2 एचपी क्षमता के चार सोलर चालित जल पंप लगाए जाने की योजना है। इसके साथ ही प्रकृति पथ (नेचर वॉक वे), बैठने की व्यवस्था, बर्ड वॉचिंग प्वाइंट तथा डस्टबिन जैसी पर्यावरण-अनुकूल आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे जिम्मेदार पर्यटन और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।
पीलीभीत में उभरेगा नया पर्यटन केंद्र
गौहनिया आर्द्रभूमि के विकास से इसके पीलीभीत के प्रमुख ईको-टूरिज्म एवं बर्ड वॉचिंग गंतव्य के रूप में उभरने की उम्मीद है। यह पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ जिले के पर्यटन आकर्षणों को और सशक्त करेगा तथा होमस्टे, गाइड, नैचुरलिस्ट एवं अन्य ईको-टूरिज्म गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
वन विभाग की यह पहल आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और समुदाय आधारित सतत विकास के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

