रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। जनपद के बीसलपुर के सरकारी अस्पताल में अव्यवस्थाओं की तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। अस्पताल परिसर में चूहों के बढ़ते आतंक ने भर्ती मरीजों, प्रसूताओं और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। हालत यह है कि जच्चा-बच्चा वार्ड तक में चूहे खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं, जिससे नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जच्चा-बच्चा वार्ड में असुरक्षित माहौल
अस्पताल में भर्ती महिलाओं और उनके परिजनों का कहना है कि दिन और रात दोनों समय वार्ड में चूहों की आवाजाही बनी रहती है। कई बार चूहे बेड के नीचे और आसपास घूमते देखे गए हैं। प्रसूताओं ने बताया कि रात में चूहों की संख्या अधिक हो जाती है, जिससे भय का वातावरण बना रहता है।
नवजात शिशुओं को लेकर सबसे अधिक चिंता जताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कोई बड़ी घटना भी हो सकती है। अस्पताल में मौजूद मरीजों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
मरीजों और परिजनों में आक्रोश
भर्ती मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कूड़ा-कचरा और खाने-पीने की वस्तुओं के अवशेष खुले में पड़े रहने से चूहों की संख्या बढ़ रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण मरीजों की जान जोखिम में है।
परिजनों ने कहा कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोग पहले से ही परेशान रहते हैं, ऐसे में चूहों का आतंक उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है। खासकर जच्चा-बच्चा वार्ड जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
सीएमओ ने लिया संज्ञान
मामले की जानकारी जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार को दी गई तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को चूहों को पकड़वाने और अस्पताल परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में नियमित रूप से कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) कराया जाए और साफ-सफाई की निगरानी की जाए।
सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बने सरकारी संस्थानों में इस प्रकार की लापरवाही न केवल मरीजों के लिए खतरनाक है, बल्कि विभाग की छवि को भी प्रभावित करती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक आदेशों के बाद अस्पताल परिसर को कब तक चूहामुक्त किया जाता है और जच्चा-बच्चा वार्ड सहित अन्य वार्डों में सुरक्षित व स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जाता है। मरीजों और परिजनों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

