पीलीभीत। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश (पंजी.) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026–27 पर गहरी निराशा व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इस बजट में देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले व्यापारी समाज की पूरी तरह अनदेखी की गई है, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों में रोष व्याप्त है।
जिला अध्यक्ष एम. ए. जीलानी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग को सरकार से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट में उनकी किसी भी प्रमुख मांग को स्थान नहीं दिया गया। इससे व्यापारिक जगत में हताशा का माहौल बन गया है।
जीएसटी की जटिलता और ब्याज दरों पर नहीं मिली राहत
जीलानी ने बताया कि संगठन द्वारा जीएसटी कानून में जेल, सजा और भारी जुर्माने जैसे कठोर प्रावधानों को समाप्त करने की मांग की गई थी, लेकिन इस दिशा में कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान व्यापारियों के लिए मानसिक उत्पीड़न का कारण बने हुए हैं।
इसके साथ ही व्यापारियों और उद्योगपतियों के लोन व क्रेडिट लिमिट पर लगने वाली बैंक ब्याज दरों में भी कोई कटौती नहीं की गई, जिससे व्यापार की लागत लगातार बढ़ रही है।
आईटीसी रिफंड और स्थानीय करों पर भी निराशा
संगठन ने यह भी उठाया कि जीएसटी स्लैब घटने के बाद 10 प्रतिशत व 7 प्रतिशत टैक्स अंतर की जो राशि जीएसटी आईटीसी पोर्टल पर फंसी हुई है, उसे वापस करने को लेकर बजट में कोई घोषणा नहीं की गई। वहीं मंडी समिति जैसे स्थानीय करों को समाप्त करने संबंधी कोई निर्देश भी जारी नहीं किए गए।
इसके अलावा आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक एवं औद्योगिक संस्थानों को नियमित करने को लेकर भी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
जमीनी व्यापार को नहीं मिलेगा प्रोत्साहन
अंत में जिला अध्यक्ष एम. ए. जीलानी ने कहा कि यह बजट जमीनी हकीकत से दूर प्रतीत होता है और इससे छोटे व मध्यम व्यापारियों को कोई ठोस प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। संगठन ने सरकार से मांग की है कि व्यापारी समाज की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएंगा।

