पीलीभीत में मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन को लेकर बहु-विभागीय कार्यशाला…मरौरी ब्लॉक में विश्व प्रकृति -भारत के सहयोग से हुआ आयोजन

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(रिंटू वर्मा)

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में बढ़ते मानव–हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से वन एवं वन्यजीव प्रभाग द्वारा विश्व प्रकृति निधि–भारत के सहयोग से मरौरी ब्लॉक परिसर में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वन विभाग के साथ कृषि, राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं विकास, सिंचाई, विद्युत विभाग सहित ग्राम प्रधान, बाघ मित्र एवं अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक

प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिज़र्व  मनीष सिंह ने बताया कि हाथियों से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही बाघ मित्रों, ग्राम प्रधानों एवं ईको-विकास समितियों के प्रतिनिधियों को सशक्त बनाकर मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों के आपसी समन्वय को बेहद जरूरी बताया।

संघर्ष कम करने में अहम होंगी ऐसी कार्यशालाएं

प्रभागीय निदेशक, वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने कहा कि पीलीभीत जनपद में मानव–हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस प्रकार की कार्यशालाओं से प्रशिक्षित बाघ मित्र और विभागीय कर्मचारी संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

औषधीय फसलों से मिल सकता है समाधान

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने सुझाव दिया कि जंगल के किनारे औषधीय फसलों की खेती कर मानव–हाथी संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर संभव सहयोग देने की बात कही, जबकि सीओ ट्रैफिक श्री विधि मौर्य ने पुलिस विभाग के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।

हाथी अपने पूर्वजों के इलाकों में करते हैं भ्रमण

डा. अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि हाथियों का एक लंबा इतिहास रहा है और वे अपने अनुवांशिक गुणों के कारण अपने पूर्वजों के इलाकों में ही भ्रमण करते हैं। डीएफओ उत्तर खीरी वन प्रभाग कीर्ति चौधरी ने पीलीभीत टाइगर रिज़र्व एवं दुधवा टाइगर रिज़र्व के बीच बेहतर समन्वय कर हाथी कॉरिडोर को मजबूत करने पर जोर दिया।

कॉरिडोर, SOP और मुआवजा प्रक्रिया पर दी गई जानकारी

WWF-India के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी  तराई एलिफेंट रिज़र्व, हाथियों के व्यवहार, प्राकृतिक आवास, कॉरिडोर तथा दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों एवं बाघ मित्रों को मुआवजा प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), समुदाय आधारित संस्थाओं तथा त्वरित प्रतिक्रिया दलों के गठन पर प्रस्तुतीकरण दिया। वरिष्ठ परियोजना अधिकारी श्री नरेश कुमार ने वन्यजीवों से होने वाली जन-धन क्षति की मुआवजा प्रक्रिया साझा करते हुए कार्यशाला का संचालन किया।

अनेक अधिकारी व कर्मचारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में एसडीओ  रमेश चौहान, जेई  दीपक शुक्ल (शारदा सागर), वीडीओ मरौरी लियाक़त अली, वीडीओ अमरिया  दिनेश सिंह, वीडीओ ललौरीखेड़ा  लक्ष्मण प्रसाद, उप निरीक्षक  शेर सिंह सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


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