रिंटू वर्मा…
पीलीभीत।स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पीलीभीत से संबद्ध चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं संक्रमण-नियंत्रित बनाने के उद्देश्य से नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय, लैब टेक्नीशियन एवं अन्य सहायक कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण नव निर्मित 200 बेड चिकित्सालय के भूतल स्थित लेक्चर थियेटर में पूर्वाह्न 11बजे से अपराह्न 1 बजे तक संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य अस्पताल में रोगी सुरक्षा को मजबूत करना, संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित करना, बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित प्रबंधन की जानकारी देना तथा मानक उपचार प्रोटोकॉल के प्रति कर्मचारियों की जागरूकता और कौशल में वृद्धि करना रहा।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दिया व्यावहारिक मार्गदर्शन
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ संकाय सदस्यों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की—
डॉ. जगदम्बा शरण, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, सर्जरी विभाग
विषय: कम्युनिकेशन स्किल्स तथा इंट्राडर्मल, सबक्यूटेनियस, इंट्रामस्क्युलर एवं इंट्रावीनस इंजेक्शन तकनीक।
डॉ. संजय कुमार आचार्य, माइक्रोबायोलॉजी विभाग
विषय: सुई चुभने की दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यूनिवर्सल प्रिकॉशन्स।
डॉ. हुमा खान, सह-आचार्य, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग
विषय: बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एवं स्रोत स्तर पर अपशिष्ट पृथक्करण।
डॉ. अरविन्द एम०, प्रभारी आईसीयू
विषय: संक्रमण नियंत्रण एवं क्रिटिकल केयर के मानक प्रोटोकॉल।
डॉ. मो. आज़ाद, सहायक आचार्य, पीडियाट्रिक्स विभाग
विषय: रोगी देखभाल एवं वार्ड प्रबंधन।

प्रतिभागियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को संक्रमण नियंत्रण की मानक प्रक्रियाओं, सुरक्षित इंजेक्शन तकनीक, बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन तथा रोगियों से प्रभावी संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही प्रशिक्षण की उपस्थिति, विषय-वस्तु एवं अभिलेखीकरण का समुचित संधारण भी सुनिश्चित किया गया।
हर बुधवार नियमित रूप से होगा प्रशिक्षण
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने निर्देश दिए हैं कि इस प्रकार के प्रशिक्षण सत्र प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि चिकित्सालय में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, रोगी सुरक्षा एवं संक्रमण नियंत्रण मानकों को निरंतर सुदृढ़ किया जा सके।

