पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पीलीभीत में शुक्रवार को एक अनोखा और शिक्षाप्रद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें वर्ष 2025 बैच के 100 छात्र-छात्राओं ने “रोगी होना क्या होता है” विषय पर प्रभावी नाट्य प्रस्तुतियाँ (रोल प्ले) दीं। यह कार्यक्रम एमबीबीएस के AETCOM पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को मरीजों की पीड़ा व भावनाओं को समझने और डॉक्टर की संवेदनशील भूमिका से परिचित कराना है।
फिजियोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चार समूहों के माध्यम से छात्रों ने दर्शाया कि डॉक्टर की एक छोटी-सी सहानुभूति भी मरीज के भय, दर्द और मानसिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकती है। प्रस्तुतियाँ न केवल भावनात्मक थीं, बल्कि डॉक्टर–मरीज संबंधों को मानवीय दृष्टिकोण से समझाने वाली भी रहीं।
मन को छू लेने वाला प्रदर्शन
25-25 छात्रों के चार समूहों ने मरीजों की स्थिति, इलाज के दौरान उनके मन में उठने वाले सवाल, और डॉक्टर के व्यवहार का उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। रोल प्ले की अभिव्यक्ति इतनी स्वाभाविक रही कि उपस्थित चिकित्सा शिक्षकों ने तालियों से छात्रों का उत्साह बढ़ाया।
प्राचार्य एवं विभागाध्यक्षों ने दी प्रेरणा
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने छात्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ एक डॉक्टर को सिर्फ तकनीकी रूप से नहीं, बल्कि मानवीय रूप से भी परिपक्व बनाती हैं।
फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीयसी ने कार्यक्रम का संचालन किया और छात्रों को रोल प्ले की शैक्षणिक उपयोगिता समझाई।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ पी.सी. श्रीवास्तव ने care और cure दोनों के महत्व पर प्रकाश डाला।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपिका वर्मा ने छात्रों के प्रदर्शन को उत्कृष्ट बताते हुए उनकी संवेदनशीलता की सराहना की।
शिक्षकों की सहभागिता ने बढ़ाई शोभा
इस कार्यक्रम में डॉ. मुकेश पांडे, डॉ. स्नेहा सुमन, डॉ. कमलेश यादव, डॉ. सारांश, डॉ. प्रियंका यादव, डॉ. युवी और डॉ. आभा रानी की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही।

