रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के दिव्यांग बच्चों के लिए खुशखबरी है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन की एक सराहनीय पहल से अब उन्हें जंगल सफारी का रोमांच नि:शुल्क अनुभव करने का अवसर मिलेगा। ‘प्रोजेक्ट दिव्य दर्शन’ के तहत तैयार की गई इस विशेष योजना से करीब 3400 दिव्यांग बच्चों को बारी-बारी से रिजर्व में सफारी कराई जाएगी।
3400 बच्चों का तैयार हुआ रोस्टर प्लान
टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जिला पुनर्वास विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से व्यापक सर्वे कराया।
- लगभग 2700 दिव्यांग बच्चे विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत पाए गए।
- करीब 800 बच्चे ऐसे चिन्हित किए गए जो किसी शिक्षण संस्था से जुड़े नहीं हैं।

सभी बच्चों का डाटा एकत्र कर एक रोस्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत प्रत्येक बुधवार को (साप्ताहिक बंदी के दिन) इन बच्चों को विशेष रूप से जंगल सफारी कराई जाएगी, ताकि उन्हें सुरक्षित और सहज वातावरण में प्रकृति के दर्शन कराए जा सकें।
प्रकृति से जुड़ाव और आत्मविश्वास बढ़ाने की पहल
रिजर्व प्रशासन का उद्देश्य केवल सफारी कराना नहीं, बल्कि दिव्यांग नौनिहालों को प्रकृति के करीब लाना और उन्हें अपनी प्राकृतिक धरोहर से परिचित कराना है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व देश-विदेश में अपनी समृद्ध जैव विविधता और बाघों की बढ़ती संख्या के लिए प्रसिद्ध है। हर बाघ गणना में यहां संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके कारण रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिल चुका है।
यहां आने वाले पर्यटक बाघ, तेंदुआ, भालू, अजगर सहित अनेक वन्यजीवों के दर्शन के साथ-साथ हरे-भरे वन क्षेत्र और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। अब यही अनुभव जनपद के दिव्यांग बच्चों को भी नि:शुल्क मिलेगा।
अधिकारियों का वक्तव्य
डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया—
“जनपद के दिव्यांग बच्चों को जंगल सफारी का अनुभव कराना हमारा उद्देश्य है और उन्हें प्रकृति के करीब लाना है, ताकि वे इस अमूल्य धरोहर के बारे में जान सकें। इसके लिए एक सुव्यवस्थित योजना बनाई गई है। बुधवार को इन बच्चों को विशेष रूप से सफारी का अवसर दिया जाएगा।”

