रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व इस समय गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। बजट जारी न होने के कारण वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि विभाग के नियमित कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी देरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे कर्मचारियों में चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
स्वीकृत बजट का बड़ा हिस्सा अभी भी लंबित
जानकारी के अनुसार पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए कुल 5.72 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन अब तक विभाग को केवल 90 लाख रुपये ही प्राप्त हो सके हैं। स्वीकृत धनराशि का अधिकांश भाग अभी तक जारी नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि नई वित्तीय प्रणाली लागू होने के कारण बजट की शेष धनराशि जारी होने में देरी हो रही है, जिससे विभागीय योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
हाथियों के भोजन और संरक्षण कार्य प्रभावित
धन की कमी का सीधा असर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण और प्रबंधन कार्यों पर पड़ रहा है। टाइगर रिजर्व में मौजूद हाथियों के भोजन और देखभाल की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके अलावा ग्रासलैंड मैनेजमेंट, वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े कार्य और अन्य आवश्यक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। कार्यालय संचालन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए भी विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों के वेतन पर भी पड़ा असर
बजट के अभाव में वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। समय पर वेतन न मिलने से कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बन रही है। विभागीय अधिकारियों के सामने सीमित संसाधनों में कार्य संचालन की चुनौती खड़ी हो गई है।
पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था बनी देरी का कारण
इस संबंध में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि विभिन्न मदों में वित्तीय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसी कारण बजट जारी होने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि विभाग को शेष बजट मिलने की उम्मीद है और पूर्व में प्राप्त धनराशि से कई जरूरी भुगतान किए जा चुके हैं।
जल्द बजट जारी होने की उम्मीद
वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब शेष बजट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि बजट मिलने के बाद सभी लंबित कार्यों को गति मिलेगी और टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन कार्य पहले की तरह सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगे।

