पीलीभीत। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने आगामी राष्ट्रीय बाघ गणना–2026 की तैयारियों को लेकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व को नोडल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चयनित किया है। इस निर्णय के बाद पीटीआर पूरे प्रदेश के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।
10 दिसंबर से शुरू होगी बाघ गणना प्रक्रिया
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 10 दिसंबर से बाघों की गणना का कार्य आरंभ होने जा रहा है। इससे पहले पीटीआर की विशेष टीम देहरादून में तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी है। यह प्रशिक्षित टीम अब पीटीआर की पांचों रेंजों की टीमों को बाघ गणना से जुड़े सभी वैज्ञानिक तरीकों का प्रशिक्षण दे रही है।
पांच वन प्रभागों के अधिकारी होंगे शामिल
4 और 5 दिसंबर को आयोजित होने वाले दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के पांच वन प्रभागोंबिजनौर, शिवालिक, सामाजिक वानिकी बिजनौर, सामाजिक वानिकी शाहजहांपुर और सामाजिक वानिकी पीलीभीत के अधिकारी भाग लेंगे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रशिक्षित अधिकारी इन सभी टीमों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
पहले दिन सभागार में तकनीकी प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन सभागार में अधिकारियों को बाघ गणना की बारीकियों से रूबरू कराया जाएगा। इसमें कैमरा ट्रैपिंग, पगमार्क पहचान, ट्रांजेक्ट लाइन सर्वे, डाटा कलेक्शन, और जंगल में बाघों की गतिविधियों के संकेतों को समझने जैसे विषय शामिल होंगे। आधुनिक तकनीक और सैटेलाइट मैपिंग का उपयोग भी प्रशिक्षण का हिस्सा रहेगा।
दूसरे दिन जंगल में फील्ड प्रैक्टिकल
6 दिसंबर को अधिकारियों को जंगल क्षेत्र में ले जाकर बाघ गणना के वास्तविक तौर-तरीकों का अभ्यास कराया जाएगा। इसमें *कैमरा ट्रैप लगाने, पगमार्क पहचानने, नमूना संग्रह, वन्यजीव गतिविधियों का अवलोकन और डाटा रिकॉर्डिंग जैसे कार्य शामिल होंगे। इससे अधिकारियों को वास्तविक परिस्थितियों में गणना प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।
प्रदेश के लिए गौरव की बात
पीलीभीत टाइगर रिजर्व को नोडल प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह रिजर्व बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों और बढ़ती बाघ संख्या के कारण देशभर में पहचान बना चुका है।

