(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। उत्तरप्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों में बाघ और तेंदुओं के हिंसक व्यवहार, अचानक स्वभाव परिवर्तन अथवा बीमारी और चोट की स्थिति में अब उन्हें दूर-दराज के चिड़ियाघरों में नहीं भेजा जाएगा। रेस्क्यू किए गए बाघ-तेंदुओं को अब पूरनपुर रेंज के गोपालपुर वन क्षेत्र में तैयार किए जा रहे रेस्क्यू पुनर्वास केंद्र में ही सुरक्षित रखा जाएगा, जहां उनका इलाज और देखभाल की जाएगी।
तीसरा चरण अंतिम दौर में, चौथे चरण का बजट स्वीकृत
निर्माणाधीन रेस्क्यू सेंटर का तीसरे चरण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। इसी क्रम में शासन की ओर से चौथे और अंतिम चरण के लिए 90.43 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया गया है। टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार सभी कार्य पूरे होने के बाद संभवतः मई माह तक रेस्क्यू सेंटर का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
एक साथ 13 बाघ-तेंदुओं को रखने की व्यवस्था
रेस्क्यू सेंटर को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि इसमें एक समय में 13 बाघ एवं तेंदुओं को सुरक्षित रूप से रखा जा सके। यहां उनके इलाज, निगरानी और आवश्यक देखभाल की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे उन्हें प्राकृतिक वातावरण के अधिक निकट रखा जा सकेगा।
अब नहीं होगी चिड़ियाघरों की ‘उम्रकैद’
अब तक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में किसी बाघ या तेंदुए के हिंसक होने या बीमार पड़ने पर उन्हें इलाज के नाम पर गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर के चिड़ियाघरों में भेजा जाता रहा है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद से करीब 11 बाघ-बाघिनों को रेस्क्यू कर चिड़ियाघरों में भेजा गया, लेकिन इनमें से कोई भी वापस जंगल नहीं लौट सका। इससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े होते रहे हैं।
केसरी बाघ की मौत ने बढ़ाई चिंता
गोरखपुर चिड़ियाघर में रखे गए पीटीआर के केसरी बाघ की बीमारी के चलते हुई मौत ने वन विभाग और केंद्र सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया था। इसी के बाद पीलीभीत में ही रेस्क्यू एवं पुनर्वास केंद्र बनाने की योजना को गति मिली।
चार चरणों में हो रहा 14.33 करोड़ का निर्माण कार्य
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद गोपालपुर जंगल क्षेत्र में पांच हेक्टेयर भूमि पर करीब 14.33 करोड़ रुपये की लागत से रेस्क्यू पुनर्वास केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। यह कार्य चार चरणों में पूरा किया जाना है।
पहले दो चरणों में बन चुकीं प्रमुख सुविधाएं
वर्ष 2022-23 में प्रथम चरण के तहत 4.72 करोड़ रुपये की लागत से रेस्क्यू सेंटर भवन, खाद्य भंडार, अस्पताल, टॉयलेट ब्लॉक, बाउंड्रीवॉल और सीवर लाइन का निर्माण कराया गया। दूसरे चरण में 4.53 करोड़ रुपये से सब स्टेशन, गार्ड रूम और पोस्टमार्टम रूम जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं तैयार की गईं।
तीसरे और चौथे चरण में क्या होगा खास
तीसरे चरण में 4.83 करोड़ रुपये की लागत से रेस्क्यू सेंटर को शीघ्र उपयोगी बनाने के लिए प्राथमिकता वाले कार्य कराए गए, जो अब अंतिम चरण में हैं। चौथे चरण में ड्रेनेज व्यवस्था, अस्पताल के लिए आधुनिक उपकरण और बायो-सिक्योरिटी से जुड़े कार्य कराए जाएंगे।
रेस्क्यू के आंकड़े बताते हैं हकीकत
पीटीआर के आंकड़ों के अनुसार टाइगर रिजर्व बनने के बाद अब तक 26 रेस्क्यू ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इनमें पांच शावकों सहित 23 बाघ-बाघिन और छह तेंदुओं को रेस्क्यू किया गया। इनमें से 12 बाघों को उपचार के बाद दोबारा जंगल में छोड़ा गया, जबकि 11 बाघ-बाघिन आज भी चिड़ियाघरों में कैद हैं।
आसपास के टाइगर रिजर्वों को भी मिलेगा लाभ
रेस्क्यू सेंटर के संचालन में आने के बाद न सिर्फ पीलीभीत टाइगर रिजर्व, बल्कि आसपास के अन्य टाइगर रिजर्वों को भी घायल और बीमार वन्यजीवों के इलाज एवं पुनर्वास में बड़ी सहूलियत मिलेगी।
(फोटो मनीष सिंह डिप्टी डायरेक्टर)
“रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। चौथे चरण के लिए बजट जारी हो चुका है। लगभग पांच माह के भीतर सभी कार्य पूरे कर संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इससे पीटीआर के साथ-साथ आसपास के टाइगर रिजर्वों को भी लाभ मिलेगा।”
— मनीष सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व

