पीलीभीत में मानव–बाघ संघर्ष पर लगेगा लगाम, ‘टीओटीआर’ प्रोजेक्ट को मंजूरी, 90 लाख का बजट स्वीकृत

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( रिंटू वर्मा )

पीलीभीत।:- पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार बढ़ती संख्या के साथ जंगल से बाहर उत्पन्न हो रहे मानव–वन्यजीव संघर्ष पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से टाइगर आउटसाइड द टाइगर रिजर्व (टीओटीआर) प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत टाइगर रिजर्व से बाहर घूम रहे बाघों के प्रबंधन के लिए वन एवं वन्यजीव प्रभाग को 90 लाख रुपये का बजट उपलब्ध कराया जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से होगी निगरानी

आवंटित बजट से बाघों के प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की जाएगी। इसके साथ ही वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद जंगल से बाहर घूम रहे बाघों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम का सहारा लिया जाएगा।

2014 में मिला था टाइगर रिजर्व का दर्जा

पीलीभीत के जंगलों को जून 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके बाद बाघ संरक्षण को नई दिशा मिली और बाघ–तेंदुओं समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व की पहचान बनी। हालांकि सीमित संसाधनों के चलते कई बाघ और तेंदुए जंगल से बाहर आबादी क्षेत्रों की ओर निकल आए, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने लगीं।

पिछले साल दहशत का दौर

बीते वर्ष मई महीने में एक बाघिन के हमलों से पूरा जिला दहशत में आ गया था। इन हमलों में पांच लोगों की जान चली गई थी। कुल मिलाकर 17 मई से 12 नवंबर के बीच बाघ हमलों में आठ लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा अलग-अलग घटनाओं में चार तेंदुओं की भी मौत हुई, जिनमें तीन सड़क हादसों में और एक रेस्क्यू के बाद दम तोड़ गया।

पहले चरण में चार जिलों में लागू

मानव–बाघ संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने टीओटीआर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की हरी झंडी के बाद पहले चरण में यह पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश के चार जिलों, जिनमें पीलीभीत भी शामिल है, में लागू किया जा रहा है।

स्थानीय समुदायों को भी किया जाएगा सशक्त

प्रोजेक्ट के तहत वनकर्मियों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का क्षमता विकास किया जाएगा। रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, ताकि आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।

ज़गल से बाहर घूम रहे 06 बाघ-तेंदुए

मौजूदा समय में पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर 05 बाघ और 01 तेंदुआ सक्रिय हैं।

  • एक बाघ बराही रेंज के बाहर लंबे समय से आबादी क्षेत्र में घूम रहा है।
  • दूसरा बाघ माधोटांडा क्षेत्र के केसरपुर इलाके में सक्रिय है।
  • तीसरा बाघ पूरनपुर तहसील के सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में देखा जा रहा है।
  • बरखेड़ा क्षेत्र में एक तेंदुआ पिछले एक माह से आबादी इलाके में चहलकदमी कर रहा है, जिसे रेस्क्यू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

इन सभी बाघ–तेंदुओं की निगरानी के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व और वन एवं वन्यजीव प्रभाग की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार नजर बनाए हुए हैं।

अधिकारियो का कथन

“शासन की ओर से जंगल से बाहर घूम रहे बाघों के प्रबंधन के लिए टीओटीआर प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है। इससे मानव–बाघ संघर्ष में निश्चित रूप से कमी आएगी और वन एवं वन्यजीव प्रभाग इस दिशा में और अधिक सशक्त होगा।”
भरत कुमार डीके, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग


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