(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। एक ओर जहां केंद्र और प्रदेश सरकार आयुष पद्धतियों—आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है, वहीं पीलीभीत के मेडिकल कॉलेज में स्थापित आयुष विंग पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है। आयुष विंग में ताले लटके होने के कारण दूर-दराज से आने वाले मरीज आयुष चिकित्सा की सुविधाओं से वंचित हैं।
जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज बनने तक बदली तस्वीर
जब यह संस्थान जिला अस्पताल के रूप में संचालित था, तब प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे। उस समय आयुष विंग में भी बड़ी संख्या में मरीज विभिन्न पद्धतियों से उपचार का लाभ उठाते थे। कोरोना महामारी के दौरान भी आयुष विंग ने मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित होने के बाद आयुष विंग पर ताले जड़ दिए गए, जिससे यह सुविधा पूरी तरह ठप हो गई।
पीलीभीत आयुष विंग में चार पद्धतियों की सुविधा थी उपलब्ध
मेडिकल कॉलेज परिसर में पहले आयुष विंग के अंतर्गत होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी और योग की सेवाएं संचालित थीं। बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचकर उपचार कराते थे। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मरीजों की संख्या हजारों में पहुंच गई है, लेकिन आयुष विंग बंद होने से मरीजों को केवल एलोपैथिक उपचार पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
कोरोना महामारी में आयुष विंग ने निभाई थी अहम् भूमिका
आज पीलीभीत के जिस आयुष विंग में ताले लटके नजर आ रहे वही कोरोना महामारी में इसी आयुष विंग के डॉक्टर्स सहित कर्मचारियों ने अहम् भूमिका निभाकर मरीजो की जान बचाई थी आज उसी विंग को ताले लगाकर बंद कर दिया है। आखिर जिमेदार कौन?
प्रदेश भर में आयुष विंग, पीलीभीत में ताले क्यों?
पूरे उत्तर प्रदेश में अधिकांश मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में आयुष विंग संचालित हैं, लेकिन पीलीभीत मेडिकल कॉलेज इसका अपवाद बना हुआ है। यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब सरकार आयुष को जन-जन तक पहुंचाने की बात कर रही है, तो फिर पीलीभीत में आयुष विंग को बंद क्यों रखा गया है?
जिम्मेदारी किसकी? उठ रहे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेडिकल कॉलेज के आयुष विंग में ताले डालने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासनिक उदासीनता इसके पीछे कारण है या फिर स्टाफ और संसाधनों की कमी? मरीजों को आयुष सुविधाओं से दूर क्यों किया गया—इसका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
मरीजों और जनमानस की मांग
मरीजों और स्थानीय लोगों की मांग है कि पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में आयुष विंग को शीघ्र पुनः शुरू किया जाए, ताकि आयुष चिकित्सा पद्धतियों का लाभ फिर से मिल सके और सरकार की मंशा के अनुरूप आयुष को मुख्यधारा में लाया जा सके।
आखिर क्यों बंद हुआ आयुष विंग, कौन है जिम्मेदार, क्या कारण है? क्या है अधिकारियो, जनप्रतिनिधियों सहित जनता की राय अगले अंक में होगा प्रकाशित –

