(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत।वित्तीय सेवाएँ विभाग एवं भारतीय रिजर्व बैंक के तत्वावधान में राष्ट्रव्यापी अभियान “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” के अंतर्गत पीलीभीत में विशेष जागरूकता एवं दावा निपटान कैंप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह एवं विशिष्ट अतिथि मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्रश्रीवास द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
अभियान का उद्देश्य और महत्व
डीएम पीलीभीत ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि यह अभियान भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से वर्षों से बैंकों में बिना दावेदार पड़ी धनराशि को उसके वास्तविक खाताधारकों को वापस किया जा रहा है। उन्होंने इसे आमजन के हित में एक सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि इससे न केवल लोगों को उनका हक मिलेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की दिशा में भी मजबूती मिलेगी। यह अभियान राष्ट्रव्यापी स्तर पर अपने नौवें चरण में संचालित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
देशभर में हजारों करोड़ रुपये डेफ खातों में जमा
बैंक ऑफ बड़ौदा से आए जनपद के सहायक महाप्रबंधक विवेक शर्मा ने जानकारी दी कि देशभर में लगभग 78 हजार करोड़ रुपये भारतीय रिजर्व बैंक के डेफ खातों में जमा हैं। उन्होंने लोगों से अपने खातों में नामांकन (नॉमिनी) जोड़ने और आसपास के लोगों को भी इस अभियान के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
पीलीभीत में अब तक 196 लाख रुपये लौटाए गए
अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) ने बताया कि जनपद में इस अभियान के तहत अब तक 198 खाताधारकों को 196 लाख रुपये की धनराशि वापस की जा चुकी है। कैंप के माध्यम से
- बैंक ऑफ बड़ौदा के 5 खाताधारक,
- भारतीय स्टेट बैंक के 11 खाताधारक,
- पंजाब एंड सिंध बैंक के 4 खाताधारक एवं
- उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के 3 खाताधारकों
को डीएम और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि जनपद में करीब 2.5 लाख खातों में 53.35 करोड़ रुपये की राशि वर्षों से डम्प पड़ी हुई है। यह अभियान 31 दिसंबर 2025 तक चलेगा, जिसके दौरान खाताधारक या दावेदार अपने संबंधित बैंकों से संपर्क कर अपनी रकम वापस प्राप्त कर सकते हैं। आरबीआई का संदेश है—“जागरूक बनें, समझदार बनें।”
क्या होता है निष्क्रिय खाता
एलडीएम राजकुमार सेठ ने बताया कि यदि किसी बचत या चालू खाते में लगातार दो वर्षों तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो वह खाता निष्क्रिय माना जाता है। ऐसे खातों में धन सुरक्षित रहता है, लेकिन कई बैंकिंग सुविधाएं बंद हो जाती हैं। केवाईसी अपडेट कराने पर खाता पुनः सक्रिय हो जाता है। यदि खाता 10 वर्षों तक निष्क्रिय रहता है, तो उसमें मौजूद धनराशि आरबीआई के डेफ खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है।
राशि पाकर खिल उठे खाताधारकों के चेहरे
वर्षों से डम्प पड़ी रकम वापस मिलने पर खाताधारकों में खुशी की लहर देखने को मिली।
- बीसलपुर निवासी शफी खान चैरिटेबल ट्रस्ट को 4,03,135 रुपये,
- पीलीभीत निवासी प्रेमवती को 3,95,749.19 रुपये,
- ललौरीखेड़ा निवासी अतुल गंगवार को 47,000 रुपये
की राशि इस अभियान के माध्यम से वापस प्राप्त हुई।
कार्यक्रम का संचालन मंसूर अहमद शम्सी ने किया, जबकि अंत में एलडीएम द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।

