पीलीभीत। कहते हैं, “प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती”— और इस कहावत को सच कर दिखाया है पीलीभीत जिले के गोंछ गांव पोस्ट गहलुईया, ब्लॉक ललौलीखेड़ा के रिहान अहमद की। एक हाथ से दिव्यांग रिहान ने अपनी मेहनत, लगन और जज्बे के दम पर भारतीय पैरा क्रिकेट टीम में जगह बनाई है। उनके चयन की खबर मिलते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। हर कोई इस होनहार खिलाड़ी पर गर्व महसूस कर रहा है।
रिहान के पिता है राजमिस्त्री
रिहान के पिता रिफाकत हुसैन राजमिस्त्री का काम करते थे। लेकिन रिहान के बचपन में ही पिता का साया उठ गया था। परिवार में चार बेटे और दो बेटियां थीं। बड़े दो भाई पिता का काम संभालते हुए परिवार का खर्च उठाने लगे। तीसरे नंबर पर आने वाले रिहान का एक हाथ बचपन से ही बेकार था, पर उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
क्रिकेट से था गहरा लगाव
रिहान को बचपन से ही क्रिकेट से गहरा लगाव था। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने गांव के मैदान में क्रिकेट खेलते रहते थे। उन्होंने निश्चय कर लिया था कि जीवन में कुछ बड़ा करना है और खेल के माध्यम से खुद को साबित करना है। 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने गांव छोड़कर बरेली में अपने मामा के घर रहने का निर्णय लिया ताकि खेल की बेहतर तैयारी कर सकें।
बरेली स्पोर्ट्स स्टेडियम में पैरा क्रिकेट की ट्रेनिंग शुरू की
बरेली स्पोर्ट्स स्टेडियम में उन्होंने पैरा क्रिकेट की ट्रेनिंग शुरू की। कठिन परिश्रम और समर्पण का नतीजा यह रहा कि वर्ष 2023 में उनका चयन उत्तर प्रदेश पैरा क्रिकेट टीम में हुआ। चेन्नई में आयोजित पहली बड़ी सीरीज़ में रिहान ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने कई राज्यों में खेले गए मैचों में हिस्सा लिया और एक प्रतियोगिता में ‘बेस्ट बॉलर’ का ट्रॉफी भी जीता।
श्रीलंका में होने वाली सीरीज़ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे रिहान
हाल ही में 21 से 27 सितंबर तक देहरादून में अंतरराष्ट्रीय पैरा क्रिकेट टीम का चयन ट्रायल आयोजित हुआ, जहां रिहान ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। नतीजा यह रहा कि उनका चयन भारतीय पैरा क्रिकेट टीम में हो गया। अब वह श्रीलंका में होने वाली सीरीज़ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
मां की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू
रिहान की इस उपलब्धि से उनका परिवार और गांववाले फूले नहीं समा रहे हैं। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। मां की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू हैं। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे ने साबित कर दिया कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई कमी रास्ते में रुकावट नहीं बनती।”
प्रेरणा की मिसाल
रिहान की कहानी न सिर्फ संघर्ष और मेहनत की मिसाल है, बल्कि यह उन सभी के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों के आगे हार मान लेते हैं। उन्होंने यह दिखा दिया कि सच्ची लगन और आत्मविश्वास से हर मुश्किल को मात दी जा सकती है। अब पूरा देश रिहान अहमद से उम्मीद कर रहा है कि वह श्रीलंका में भी अपनी गेंदबाजी से भारत का परचम लहराएंगे।

