पीलीभीत।: तराई की गोद में बसा पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) अपनी अद्भुत जैवविविधता और वन्यजीवों की समृद्धता के लिए विश्व स्तर पर पहचान बना चुका है। बाघों के गढ़ के रूप में प्रसिद्ध यह रिजर्व अब एक और दुर्लभ और रहस्यमयी प्रजाति फिशिंग कैट की मौजूदगी से सुर्खियों में है। बाघ प्रजाति से ताल्लुक रखने वाली यह बिल्ली अपने अनोखे व्यवहार, तैराकी की कला और मछलियों के शिकार की निपुणता के लिए जानी जाती है।
खास है इस ‘मछली पकड़ने वाली बिल्ली’ की कहानी।
फिशिंग कैट का नाम ही इसके स्वभाव को परिभाषित करता है। यह बिल्ली दलदली क्षेत्रों, नदियों और तालाबों के किनारों पर पाई जाती है, जहाँ यह पानी में उतरकर बड़ी आसानी से मछलियों का शिकार करती है। अपने मजबूत पंजों और तेज दृष्टि के कारण यह मछली को पानी से खींच निकालने में बेहद कुशल होती है। यही कारण है कि इसे सामान्य घरेलू बिल्लियों की तुलना में अधिक खतरनाक और बुद्धिमान माना जाता है।यह बिल्ली आकार में भी सामान्य बिल्लियों से लगभग दोगुनी बड़ी होती है। मछलियों के अलावा यह मेंढक, केकड़े, सांप, छोटे पक्षी और चूहे भी खा लेती है। इसकी यह आदतें इसे एक सच्चा “दलदली शिकारी” बनाती हैं।
पीलीभीत में 107 फिशिंग कैट है दर्ज।
हाल ही में पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा कराई गई गणना में 107 फिशिंग कैट पाई गई हैं। वन विभाग के अनुसार यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि रिजर्व का पारिस्थितिक संतुलन बेहतर हो रहा है। बाघ संरक्षण परियोजना लागू होने के बाद से रिजर्व में न केवल बाघों की संख्या बढ़ी है, बल्कि अन्य दुर्लभ जीव-जंतुओं की आबादी भी तेजी से सुधरी है।
फिशिंग कैट मुख्य रूप से शारदा नदी, शारदा सागर बांध, माला नदी और रिजर्व के भीतर फैले दलदली क्षेत्रों के आसपास पाई जाती हैं। ये इलाक़े इनके लिए आदर्श आवास माने जाते हैं जहाँ पर्याप्त जलस्रोत और मछलियों की उपलब्धता होती है।
संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में जुटा वन विभाग।
फिशिंग कैट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईयूसीएन (IUCN) की रेड डाटा बुक में संकटग्रस्त प्रजाति (Endangered Species) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसके अस्तित्व पर खतरा दलदली क्षेत्रों के लगातार सिकुड़ने, अवैध शिकार, जलाशयों के खेतों में तब्दील होने और मछलियों के लिए प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न हुआ है।पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन इन बिल्लियों के संरक्षण के लिए ई-सर्विलांस टावरों की मदद से निगरानी कर रहा है। दलदली इलाकों में इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि इनके प्राकृतिक आवास को कोई नुकसान न पहुँचे। साथ ही स्थानीय समुदायों को भी इस दिशा में जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार इन प्रजातियों की सुरक्षा तभी संभव है जब स्थानीय लोग भी संरक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा बनें।
स्थानीय पारिस्थितिकी का स्वास्थ्य सूचक।
टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के मोहम्मद अख्तर मियां खान के अनुसार फिशिंग कैट किसी भी दलदली पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का महत्वपूर्ण सूचक है। “जहाँ फिशिंग कैट की आबादी स्थिर या बढ़ती हुई दिखे, वहाँ का जलवायु संतुलन और जैवविविधता भी सशक्त होती है। पीलीभीत में इनकी संख्या बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन बिल्लियों के आवास बचाने के लिए दलदली क्षेत्रों का संरक्षण आवश्यक है।
सैलानियों के लिए नया आकर्षण।
अब तक पीलीभीत टाइगर रिजर्व बाघों और हिरणों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब फिशिंग कैट भी रिजर्व की नई पहचान बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह प्रजाति सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगी। इन बिल्लियों को खुले में तैरते या मछली पकड़ते देखना सैलानियों के लिए एक रोमांचक अनुभव साबित हो सकता है।
वन विभाग की प्राथमिकता।
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि, “रिजर्व में न सिर्फ बाघों बल्कि विलुप्त और संकटग्रस्त जीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारे सतत प्रयासों का परिणाम है कि अब सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।”उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की इस विविधता को बनाए रखना ही रिजर्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
निष्कर्ष
फिशिंग कैट की बढ़ती उपस्थिति न केवल पीलीभीत टाइगर रिजर्व की जैवविविधता की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि जब संरक्षण और सामुदायिक सहयोग एक साथ काम करते हैं, तो विलुप्ति की कगार पर पहुँची प्रजातियाँ भी फिर से जीवन पा सकती हैं। आने वाले समय में यह रहस्यमयी बिल्ली निश्चित ही पीलीभीत के जंगलों की नई पहचान बन जाएगी।

