रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। समाजवादी पार्टी ने पीलीभीत की सियासत में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए लंबे समय से जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे जगदेव सिंह ‘जग्गा’ को हटाकर धर्मेश गंगवार को जिले की कमान सौंप दी है। बुधवार को घोषित जिलाध्यक्षों की सूची में धर्मेश गंगवार का नाम सामने आने के बाद जिले की सियासत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सवाल यह है कि आखिर अखिलेश यादव ने पीलीभीत में नेतृत्व परिवर्तन क्यों किया? क्या यह महज संगठनात्मक बदलाव है या इसके पीछे 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कोई बड़ी रणनीति तैयार की जा रही है?
लंबे कार्यकाल के बाद जग्गा की विदाई
जगदेव सिंह जग्गा को जनवरी 2021 में सपा का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद करीब साढ़े पांच वर्ष तक उन्होंने जिले में संगठन की कमान संभाली। वर्ष 2026 में भी वह पार्टी के प्रमुख कार्यक्रमों और आंदोलनों में जिलाध्यक्ष के रूप में सक्रिय दिखाई दिए। जुलाई में दिल्ली जाने की तैयारी के दौरान उनके नजरबंद किए जाने की खबर भी सामने आई थी।अब अचानक संगठन में बदलाव ने स्थानीय सपाइयों के बीच भी नई चर्चा छेड़ दी है।

धर्मेश गंगवार पर क्यों जताया भरोसा?
नए जिलाध्यक्ष धर्मेश गंगवार को लेकर सामने आई रिपोर्टों में उनके पूर्व जिला पंचायत सदस्य होने और उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके परिवार के सदस्य बरेली क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं और उनके पिता ने 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।ऐसे में धर्मेश को जिम्मेदारी देने को केवल पद परिवर्तन के तौर पर देखना आसान नहीं है। यह फैसला जिले में संगठन के सामाजिक आधार और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कुर्मी मतदाताओं पर नजर?
पीलीभीत की राजनीति में कुर्मी, मुस्लिम और लोध मतदाताओं को महत्वपूर्ण सामाजिक समूह माना जाता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सपा की रणनीति को लेकर स्थानीय राजनीतिक विश्लेषणों में इन सामाजिक समीकरणों की चर्चा हुई थी।धर्मेश गंगवार को जिलाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने कुर्मी समाज से आने वाले चेहरे को संगठन के शीर्ष स्थानीय पद पर बैठाया है। इससे यह संदेश जाता है कि सपा संगठन के सामाजिक विस्तार और विभिन्न वर्गों को नेतृत्व में प्रतिनिधित्व देने पर जोर दे रही है।
2027 के लिए संगठन को रीसेट करने की कोशिश?
सपा ने एक साथ पीलीभीत समेत कई जिलों में जिलाध्यक्ष बदले हैं। नई नियुक्तियों को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जरूरत का उल्लेख किया गया है।पीलीभीत में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले में सदर, पूरनपुर, बीसलपुर और बरखेड़ा जैसी विधानसभा सीटों के अलावा लोकसभा क्षेत्र में बहेड़ी भी शामिल है। ऐसे में जिलाध्यक्ष की भूमिका केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले चुनाव में बूथ स्तर की टीम, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों को लेकर पार्टी की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण होगी।
अब धर्मेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
धर्मेश गंगवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना, संगठन में गुटबाजी को नियंत्रित रखना और बूथ स्तर तक पार्टी की सक्रियता बढ़ाना होगी।जग्गा के लंबे कार्यकाल के दौरान तैयार संगठनात्मक ढांचे को नए नेतृत्व के साथ किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। वहीं पार्टी के सामने यह चुनौती भी होगी कि सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ-साथ हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चला जाए।
कुल मिलाकर, जगदेव सिंह जग्गा की जगह धर्मेश गंगवार की नियुक्ति को सिर्फ जिलाध्यक्ष बदलने का फैसला मानने के बजाय 2027 से पहले सपा के संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है। हालांकि, इस फैसले के पीछे अखिलेश यादव की वास्तविक प्राथमिकता क्या है, यह आने वाले महीनों में पार्टी की स्थानीय गतिविधियों, संगठन विस्तार और चुनावी तैयारियों से ज्यादा स्पष्ट होगा।

