रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। उत्तरप्रदेश के पीलीभीत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के महिला अस्पताल में दो महिला स्वास्थ्यकर्मियों के बीच रुपये के लेनदेन को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय गंभीर रूप ले बैठा, जब एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने कथित तौर पर अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। अस्पताल परिसर में हुई इस घटना से हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन एक्शन शुरू कर दिया है कार्यदाई कंपनी ने दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों से स्पष्टीकरण तलब किया है, जबकि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
कमरा नंबर 19 में हुआ विवाद, मच गई अफरा-तफरी
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल के कमरा नंबर 19 में दो महिला स्वास्थ्यकर्मियों के बीच काफी समय से रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। शुक्रवार को यह विवाद अचानक बढ़ गया और कहासुनी के बीच एक महिला कर्मी अपने साथ लाई गई बोतल में भरा पेट्रोल अपने ऊपर उड़ेलने लगी। घटना होते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद अन्य स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों के परिजनों में भी दहशत फैल गई।
पेट्रोल लेकर अस्पताल पहुंचने पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि महिला स्वास्थ्यकर्मी मीना कुमारी अस्पताल परिसर में पेट्रोल से भरी बोतल लेकर आखिर क्यों पहुंची थीं। यदि यह कदम पूर्व नियोजित नहीं था तो पेट्रोल अस्पताल तक कैसे पहुंचा? वहीं यदि किसी मानसिक तनाव या विवाद के चलते ऐसा कदम उठाया गया तो उसकी वास्तविक वजह क्या थी? इन सभी बिंदुओं की जांच अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।
मरीजों और कर्मचारियों की जान पर मंडरा सकता था खतरा
जिस समय यह घटना हुई, उस समय कमरा नंबर 19 में कई मरीज मौजूद थे। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी वहां मौजूद थे। यदि किसी कारणवश आग लग जाती तो अस्पताल के भीतर भगदड़ मच सकती थी और कई लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की घटना को बेहद गंभीर माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का भी मानना है कि थोड़ी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।
कंपनी ने महिला कर्मियों से मांगा स्पष्टीकरण
घटना के बाद कंपनी ने दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। कंपनी का मानना है कि व्यक्तिगत विवाद को अस्पताल परिसर तक लाना और उससे अस्पताल की कार्यप्रणाली तथा सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। स्पष्टीकरण के आधार पर आगे विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
मेडिकल कॉलेज की छवि पर भी पड़ा असर
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों से अनुशासन और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में अस्पताल परिसर में हुए इस विवाद और आत्मदाह के प्रयास की घटना ने मेडिकल कॉलेज की छवि को भी प्रभावित किया है। कर्मचारियों के बीच आपसी विवाद सार्वजनिक होने और अस्पताल परिसर में इस तरह की स्थिति बनने से संस्थान की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
मामले की सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस भी जांच में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी, पेट्रोल अस्पताल परिसर तक कैसे पहुंचा और घटना के दौरान किन परिस्थितियों में आत्मदाह का प्रयास किया गया। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा कर रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन और पुलिस क्या कार्रवाई करते हैं।
घटना क़ो अंजाम देने क़ो लेकर बड़ा सवाल
🤔 अस्पताल परिसर में पेट्रोल लेकर क्यों पहुंची महिला कर्मी?
🤔 क्या आत्मदाह का प्रयास पूर्व नियोजित था?
🤔मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर क्या होगी कार्रवाई?
🤔विभागीय जांच में किसकी जिम्मेदारी तय होगी?
🤔पुलिस जांच के बाद क्या दर्ज होगा मुकदमा?
फिलहाल, सुरक्षा कर्मियों की तत्परता ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया, लेकिन इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के आचरण पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहना है कॉलेज प्राचार्या डॉ संगीता अनेजा का?
“पूरे घटना क़ो लेकर सीएमएस डॉ राजेश कुमार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी , रिपोर्ट के आधार पर पुलिस सहित कार्यदाई कंपनी क़ो कार्यवाई के लिए पत्र भेजा गया है। आपसी विवाद क़ो लेकर अस्पताल परिसर का प्रयोग करना गलत था।-डॉ संगीता अनेजा प्राचार्या मेडिकल कॉलेज पीलीभीत

