पीलीभीत को मिलेगी नई पहचान, प्रदेश की पहली तेंदुआ सफारी यहीं होगी तैयार… अक्टूबर माह में शिलान्यास की तैयारी ।

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रिंटू वर्मा…

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत मे वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में पीलीभीत जनपद को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। सामाजिक वानिकी प्रभाग की पूरनपुर रेंज के अंतर्गत स्थित गोपालपुर जंगल में प्रदेश का पहला ‘लेपर्ड सफारी पार्क’ विकसित किए जाने की तैयारी तेज हो गई है। करीब 1716 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 49 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शासन स्तर पर परियोजना को लेकर कवायद तेज हो चुकी है और अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में इसके शिलान्यास की तैयारी की जा रही है।

शासन को सौंपी गई विस्तृत कार्ययोजना

शासन स्तर पर आयोजित बैठक में सामाजिक वानिकी प्रभाग द्वारा तैयार की गई लेपर्ड सफारी पार्क की विस्तृत कार्ययोजना उच्चाधिकारियों को प्रस्तुत की गई थी। योजना पर सकारात्मक चर्चा के बाद अब परियोजना को मूर्त रूप देने की दिशा में तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सफारी पार्क से जुड़े अधिकांश कार्यों को जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को मिलेगा सुरक्षित आवास

इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को सुरक्षित रूप से इसी पार्क में रखा जाएगा। वर्तमान में आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुओं के प्रवेश और उनसे होने वाले संघर्ष की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। पार्क के विकसित होने के बाद ऐसे तेंदुओं को प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

पर्यटकों के लिए बनेंगे आधुनिक सुविधाओं से युक्त केंद्र

लेपर्ड सफारी पार्क को पर्यटन की दृष्टि से भी अत्याधुनिक बनाया जाएगा। प्रस्तावित ब्लूप्रिंट के अनुसार पार्क परिसर में एक भव्य स्वागत कक्ष (रिसेप्शन सेंटर) का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा 50 सीटों वाला आधुनिक थियेटर भी बनाया जाएगा, जहां आने वाले पर्यटक वन्यजीव संरक्षण, तेंदुओं के व्यवहार और जंगल की जैव विविधता से जुड़ी लघु फिल्में एवं डॉक्यूमेंट्री देख सकेंगे।

शाहजहांपुर और पीलीभीत दोनों ओर से होंगे प्रवेश द्वार

पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सफारी पार्क में दो अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए जाने का प्रस्ताव है। इनमें एक प्रवेश द्वार पीलीभीत की ओर से तथा दूसरा शाहजहांपुर की ओर से होगा। इससे दोनों जनपदों के पर्यटकों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है गोपालपुर जंगल

विशेषज्ञों के अनुसार गोपालपुर जंगल तेंदुओं के प्राकृतिक आवास के लिए बेहद उपयुक्त क्षेत्र है। यहां जलस्रोतों की प्रचुर उपलब्धता है। जंगल क्षेत्र में कहमाईया तालाब, कटईया तालाब, गुटेल वाला तालाब, पीरा ताल, अधबना तालाब तथा एक प्राकृतिक नाला मौजूद है, जो वन्यजीवों के लिए वर्षभर पानी उपलब्ध कराते हैं।

शिकार और आवरण की भी पर्याप्त व्यवस्था

तेंदुओं के लिए आवश्यक प्राकृतिक भोजन श्रृंखला भी इस क्षेत्र में उपलब्ध है। जंगल में नीलगाय, चीतल, जंगली सुअर और पाड़ा जैसे वन्यजीव पर्याप्त संख्या में पाए जाते हैं, जो तेंदुओं के प्राकृतिक शिकार हैं। इसके अलावा कांस, कुश, खस, पनहर, मूंज और पटेर जैसी घासों की मौजूदगी तेंदुओं को छिपने और शिकार करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

लेपर्ड सफारी पार्क के विकसित होने से पीलीभीत जिले में पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। साथ ही वन विभाग के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या बोले प्रभागीय निदेशक

सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने बताया कि प्रस्तावित लेपर्ड सफारी पार्क उत्तर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा। उन्होंने कहा कि पार्क के संचालन से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और विभाग को बेहतर राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगी।


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