बाघों की दहाड़ और शावकों की अठखेलियों के बीच पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पर्यटन सत्र का हुआ समापन।

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रिंटू वर्मा…

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश का टाइगर साइटिंग के लिए देशभर में पहचान बना चुका पीलीभीत टाइगर रिजर्व अब मानसून सत्र के लिए पर्यटकों के लिए बंद हो गया है। सामान्यतः 15 जून को समाप्त होने वाला पर्यटन सत्र शासन के निर्देश पर 15 दिनों के लिए बढ़ाया गया था। इसके बाद मंगलवार, 30 जून की शाम से पीलीभीत टाइगर रिजर्व और चूका ईको टूरिज्म के द्वार देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए बंद कर दिए गए। अब मानसून सत्र समाप्त होने के बाद आगामी पर्यटन सीजन की शुरुआत 1 नवंबर से होगी।

56 हजार से अधिक पर्यटकों ने किया जंगल सफारी का आनंद

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशानुसार 1 नवंबर 2025 से शुरू हुआ पर्यटन सत्र 30 जून 2026 को समाप्त हुआ। पूरे पर्यटन सत्र में चूका बीच और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कुल 56,783 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 56,567 भारतीय तथा 216 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटकों ने जंगल सफारी, टाइगर साइटिंग और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया।

1.62 करोड़ रुपये का मिला राजस्व

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के चलते विभाग को इस वर्ष 1 करोड़ 62 लाख 2 हजार 707 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण बना। पर्यटन सत्र के दौरान कई जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, न्यायपालिका से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों और विशिष्ट अतिथियों ने भी रिजर्व का भ्रमण किया।

चार बाघिनों के 10 शावकों ने बनाया सीजन यादगार

इस पर्यटन सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि और आकर्षण बाघिनों के शावकों की मौजूदगी रही। पूरे सीजन के दौरान चार अलग-अलग बाघिनों के कुल 10 शावकों का दीदार पर्यटकों को हुआ। जंगल सफारी पर निकले सैलानियों के लिए यह दृश्य किसी रोमांच से कम नहीं था। शावकों की सक्रिय मौजूदगी ने न केवल पर्यटकों का उत्साह बढ़ाया बल्कि यह भी संकेत दिया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विभाग के अनुसार यह बेहतर संरक्षण, प्रभावी प्रबंधन और अनुकूल प्राकृतिक आवास का सकारात्मक परिणाम है।

‘दिव्य दर्शन’ पहल बनी आकर्षण का केंद्र

इस वर्ष पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने देश में अपनी तरह की अनूठी पहल करते हुए ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इसके तहत दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को विशेष सफारी वाहनों के माध्यम से चूका ईको टूरिज्म स्थल का भ्रमण कराया गया। इस पहल को व्यापक सराहना मिली और इसे समावेशी पर्यटन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

पर्यटकों के लिए बढ़ाई गईं सुविधाएं

चूका पर्यटन स्थल पर रात्रि विश्राम के लिए चार थारू हट, एक बैम्बू हट और एक ट्री हट की सुविधा उपलब्ध रही। मुस्तफाबाद ईको विकास समिति द्वारा कैंटीन का संचालन किया गया, जबकि पर्यटकों के लिए स्मृति चिह्न खरीदने हेतु सोवेनियर शॉप भी संचालित रही।

इसके अलावा चार वॉच टावर, वॉटर हट, शारदा सागर डैम में मोटर बोट सफारी, प्रकृति चित्रण केंद्र और आकर्षक सेल्फी प्वाइंट पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण बने रहे। पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए 110 प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड तैनात किए गए।

नए जोन और ठहरने की सुविधाओं ने खींचा ध्यान

इस वर्ष बराही वन विश्राम भवन से सफारी संचालन शुरू कर जोन-3 का शुभारंभ किया गया। वहीं सप्त सरोवर क्षेत्र में विकसित वुडेन हट, ग्रीन हट, टेंट हट तथा कैंटीन सुविधाओं ने प्रकृति प्रेमियों को जंगल के बीच ठहरने का नया अनुभव प्रदान किया। महोफ, मुस्तफाबाद, लालपुल और पीटीआर मुख्यालय पर स्थापित सिग्नेचर गेट भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।

12 वर्षों में चार गुना बढ़ी पर्यटकों की संख्या

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में जहां केवल 14,172 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 56,783 तक पहुंच गई। इसी अवधि में राजस्व 17.69 लाख रुपये से बढ़कर 1.62 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यह उपलब्धि पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बढ़ती लोकप्रियता, बेहतर पर्यटन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण की सफलता को दर्शाती है।

अगले सत्र में मिलेंगी नई सुविधाएं

प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि आगामी पर्यटन सत्र में भी पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी तथा ईको-टूरिज्म को और अधिक आकर्षक एवं सुविधाजनक बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।


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