पीटीआर के चारों ओर बनेगा सुरक्षा कवच… इको सेंसिटिव जोन को विशेषज्ञ समिति की हरी झंडी… जल्द जारी हो सकती है केंद्र की अंतिम अधिसूचना।

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रिंटू वर्मा…

पीलीभीत।  उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व  के चारों ओर प्रस्तावित इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) को लेकर बड़ी प्रशासनिक प्रगति हुई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देने की सिफारिश कर दी है। समिति की इस संस्तुति के बाद अब केंद्र सरकार की ओर से जल्द ही अंतिम अधिसूचना जारी किए जाने की संभावना है। इसके लागू होने के बाद टाइगर रिजर्व से सटे 230 गांव पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र के दायरे में आ जाएंगे, जहां वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े प्रावधान और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकेंगे।

करीब 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास इको सेंसिटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव फरवरी 2025 में तैयार कर शासन के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया था। प्रस्ताव में टाइगर रिजर्व की वन सीमा से दो किलोमीटर तक के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की संस्तुति की गई थी। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास ऐसे क्षेत्रों को अधिसूचित कर वहां पर्यावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को नियंत्रित एवं विनियमित किया जाता है।

प्रस्ताव की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्रालय ने कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज की थीं, जिनका राज्य सरकार और टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से नियमानुसार निराकरण कर दिया गया। इसके बाद मंत्रालय ने ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर 90 दिनों के भीतर आमजन से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। इस अवधि में कुल चार आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनका निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई।

हाल ही में नई दिल्ली में डायरेक्टर, इको सेंसिटिव जोन की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद समिति ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देने की सिफारिश कर दी। अब अंतिम अधिसूचना जारी होने की औपचारिक प्रक्रिया शेष है।

575 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र होगा इको सेंसिटिव जोन

पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार रिजर्व का कुल संरक्षित क्षेत्र 730.2498 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 602.798 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र तथा 127.4518 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। प्रस्तावित इको सेंसिटिव जोन का कुल क्षेत्रफल लगभग 575 वर्ग किलोमीटर होगा, जिसकी सीमा संरक्षित वन क्षेत्र से शून्य से लेकर दो किलोमीटर तक निर्धारित की गई है।

इस दायरे में आने वाले 230 गांवों में सबसे अधिक 112 गांव माला रेंज के अंतर्गत हैं। इसके अलावा बराही रेंज के 59, दियोरिया रेंज के 30, हरीपुर रेंज के 16 तथा महोफ रेंज के 13 गांव भी इको सेंसिटिव जोन का हिस्सा बनेंगे। अधिसूचना लागू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियों की निगरानी और नियमन और अधिक सख्ती से किया जाएगा।

नेपाल और उत्तराखंड सीमा पर रहेगा ‘जीरो ईएसजेड’

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की उत्तर दिशा नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा से लगी हुई है। इन संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यहां ‘जीरो इको सेंसिटिव जोन’ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार पीलीभीत टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण बाघ आवासों में शामिल है। यह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सुरई रेंज, नेपाल के शुक्लाफांटा नेशनल पार्क तथा दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यह क्षेत्र बाघों के प्राकृतिक आवागमन का महत्वपूर्ण कॉरिडोर माना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट समेत कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां निवास करती हैं।

बाघों के कॉरिडोर को मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों का नियमानुसार निस्तारण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई थी। विशेषज्ञ समिति ने अब ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम मंजूरी के लिए संस्तुति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर को बेहतर सुरक्षा मिलेगी, मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

 


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