अपनी तनख्वाह से संवारा स्कूल, मेहनत से रचा शिक्षा का मॉडल—पिपरिया अगरू की सैयदा को राज्य अध्यापक पुरस्कार

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रिंटू वर्मा…

पीलीभीत। सोमवार का दिन बेसिक शिक्षा विभाग के लिए गौरव और खुशी की सौगात लेकर आया। मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू की प्रधान अध्यापिका सैयदा को उनकी मेहनत, लगन, शिक्षा के प्रति समर्पण और बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार के लिए राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित करने का शासन ने फैसला लिया है। जैसे ही यह खबर बेसिक शिक्षा विभाग तक पहुंची, प्रधान अध्यापिका सैयदा को फोन पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। विभागीय अधिकारियों और शिक्षकों ने इस उपलब्धि को पीलीभीत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए जिले से कई शिक्षक दावेदार थे, लेकिन शासन की ओर से निर्धारित विभिन्न मानकों और कसौटियों पर खरा उतरने के बाद सैयदा के नाम पर मुहर लगी। उनकी उपलब्धि केवल विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, सांस्कृतिक गतिविधियों, विद्यालय के कायाकल्प, बच्चों से जुड़ाव और सामाजिक सहभागिता के क्षेत्र में भी उन्होंने अलग पहचान बनाई है।

2008 में शुरू हुआ सफर, मेहनत से बनाई अलग पहचान

सैयदा की नियुक्ति 15 नवंबर 2008 को अमरिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अमरिया नंबर एक में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। नियुक्ति के बाद से ही उन्होंने शिक्षण कार्य को महज नौकरी न मानकर जिम्मेदारी के रूप में लिया। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने बेहतर शिक्षण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बच्चों को नए एवं रोचक तरीकों से पढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई। जल्द ही उनकी पहचान ब्लॉक से निकलकर जिले स्तर तक बनने लगी।

मई 2013 में उनका स्थानांतरण अमरिया ब्लॉक से मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू में हुआ। यहां आने के बाद उन्होंने विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। इसके बाद उन्हें इसी विद्यालय में प्रधान अध्यापक के पद पर पदोन्नति मिली। प्रधान अध्यापक बनने के बाद विद्यालय में छात्र-छात्राओं के नामांकन में लगातार बढ़ोतरी होने लगी और बेहतर शिक्षा के लिए पिपरिया अगरू विद्यालय की पहचान मजबूत होती चली गई।

अपनी तनख्वाह से स्कूल को दिया प्रोजेक्टर और लैपटॉप

विद्यालय को बेहतर संसाधनों से लैस करने के लिए सैयदा ने अपनी व्यक्तिगत आय का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी वेतन से विद्यालय के लिए प्रोजेक्टर और लैपटॉप उपलब्ध कराया। वहीं गांव के लोगों के सहयोग से बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था कराई गई और पुस्तकालय के लिए करीब 200 पुस्तकों का इंतजाम किया गया।

विद्यालय में आधुनिक शिक्षण व्यवस्था विकसित करने के साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए वर्कशीट तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया। वर्तमान में विद्यालय में 152 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इन बच्चों के लिए स्टाफ के सहयोग से सैयदा ने स्वयं वर्कशीट तैयार की और उन्हें प्रिंट कराकर बच्चों को उपलब्ध कराया। इससे बच्चों को कक्षा शिक्षण के साथ अभ्यास का अतिरिक्त अवसर मिलने लगा।

पहले ही आकलन में सभी बच्चे बने निपुण

पिपरिया अगरू विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था में किए गए नवाचार का असर बच्चों के परिणाम में भी दिखाई दिया। विभागीय मॉड्यूल और नए-नए शिक्षण तरीकों का इस्तेमाल करते हुए बच्चों को पढ़ाया गया। निपुण आकलन अभियान में पहली बार में ही विद्यालय के सभी बच्चे निपुण हो गए। इसके बाद शासन की ओर से प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू को निपुण विद्यालय घोषित किया गया।

इस उपलब्धि के लिए शासन और जिला प्रशासन की ओर से प्रधान अध्यापिका को सम्मानित किया गया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भी प्रदान किया गया। विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार के पीछे नियमित मेहनत और व्यक्तिगत स्तर पर बच्चों पर दिया गया ध्यान महत्वपूर्ण रहा।

1978 के भवन को कायाकल्प से बनाया आकर्षक

पिपरिया अगरू का विद्यालय भवन वर्ष 1978 में निर्मित हुआ था। पुराना भवन होने के बावजूद सैयदा ने कायाकल्प योजना, कंपोजिट ग्रांट और अपने स्तर पर प्रयास करते हुए विद्यालय का स्वरूप बदलने में अहम भूमिका निभाई। भवन की रंगाई-पुताई से लेकर विभिन्न व्यवस्थाओं को बेहतर कराया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विद्यालय परिसर में मंच भी तैयार कराया गया।

आज विद्यालय का भवन और परिसर पहले की तुलना में काफी बेहतर नजर आता है। शैक्षिक वातावरण के साथ विद्यालय की भौतिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

पढ़ाई के साथ रंगोली में भी बनाई जिलेभर में पहचान

प्रधान अध्यापिका सैयदा की प्रतिभा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। वह रंगोली कला में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। जिला स्तर पर होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में आकर्षक रंगोली और सजावट के लिए उनकी रंगोली टीम को विशेष रूप से बुलाया जाता है।

करीब तीन वर्ष पहले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह जिले में आयोजित एक समारोह में पहुंचे थे। गांधी प्रेक्षागृह में बनाई गई आकर्षक और रंग-बिरंगी रंगोली ने उनका ध्यान खींचा। उन्होंने रंगोली की जमकर सराहना की थी।

50 फीट की रंगोली में उभारा था बाघ, वन्यजीव संरक्षण का दिया संदेश

पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज के मुस्तफाबाद क्षेत्र के दौरे पर पहुंची थीं। उस समय जिला प्रशासन की ओर से मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस को सजाने-संवारने की तैयारियां की गई थीं। आकर्षक रंगोली तैयार करने की जिम्मेदारी सैयदा की टीम को दी गई।

सैयदा अपनी 12 सदस्यीय रंगोली टीम के साथ मुस्तफाबाद पहुंचीं। टीम ने करीब 50 फीट लंबी रंगोली तैयार की, जिसमें बाघ की आकर्षक आकृति के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण का संदेश कलाकृति के माध्यम से उकेरा गया। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रंगोली को देखा तो वह उसकी खूबसूरती और संदेश से प्रभावित हुईं। उन्होंने मंच से ही सैयदा समेत पूरी रंगोली टीम को अपने पास बुलाकर उनकी सराहना की। राज्यपाल का स्नेह और सम्मान पाकर टीम के सदस्यों के चेहरे खुशी से खिल उठे थे।

अधिकारियों के निरीक्षण में भी मिली विद्यालय की बेहतर व्यवस्था

विद्यालय का कई बार तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम, एसडीएम और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की शैक्षिक एवं अन्य व्यवस्थाओं की सराहना की गई। अधिकारियों के स्तर से भी प्रधान अध्यापिका के प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाता रहा।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रोशनी सिंह ने सैयदा को राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे बेसिक शिक्षा विभाग के लिए गौरव की बात है। उन्होंने प्रधान अध्यापिका के साथ विद्यालय के पूरे स्टाफ को भी बधाई दी।

बीएसए ने बताया कि उन्होंने जब-जब प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू का औचक निरीक्षण किया, वहां विद्यालय की व्यवस्थाएं बेहतर मिलीं। उन्होंने कहा कि सैयदा की मेहनत, समर्पण और शिक्षण के प्रति लगन निश्चित रूप से अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक है।

‘बच्चों का भविष्य संवारना ही सबसे बड़ी उपलब्धि’

राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित प्रधान अध्यापिका सैयदा ने अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय के स्टाफ को दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का भरपूर सहयोग मिला, तभी वह इस मुकाम तक पहुंच सकीं। अकेले किसी भी लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होता। उनका प्रयास हमेशा यही रहता है कि विद्यालय आने वाले प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा और बेहतर वातावरण मिले।

उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा, तभी उनकी मेहनत सार्थक मानी जाएगी। विद्यालय के बच्चों से उनका भावनात्मक जुड़ाव हो गया है और वह हर बच्चे की प्रगति को अपनी जिम्मेदारी मानती हैं।

सैयदा की कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि शिक्षक में इच्छाशक्ति, नवाचार और बच्चों के भविष्य को संवारने का जुनून हो तो एक साधारण सरकारी स्कूल भी जिले में मिसाल बन सकता है। राज्य अध्यापक पुरस्कार के रूप में शासन की ओर से मिली यह मान्यता पिपरिया अगरू विद्यालय के साथ पूरे पीलीभीत के बेसिक शिक्षा विभाग के लिए भी बड़ी उपलब्धि है।


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