पीलीभीत। राजकीय मेडिकल कॉलेज पीलीभीत में मानदेय भुगतान को लेकर 21 अगस्त को कार्य बहिष्कार और धरना देने के मामले में आउटसोर्सिंग कंपनी बालाजी एंटरप्राइजेज ने सख्त रुख अपनाया है। कंपनी ने पैरामेडिकल स्टाफ समेत संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सेवा अनुबंध के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा समाप्ति भी शामिल है।
कंपनी ने कर्मचारियों की ओर से कई माह का मानदेय नहीं मिलने के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। प्रबंधन का दावा है कि मई माह का मानदेय सभी संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों में पहले ही स्थानांतरित किया जा चुका है। इसके समर्थन में बैंक ट्रांसफर रिकॉर्ड भी उपलब्ध होने की बात कही गई है। वहीं, जून और जुलाई माह का मानदेय प्रशासनिक औपचारिकताओं के चलते अभी प्रक्रियाधीन बताया गया है।
नोटिस के अनुसार 21 अगस्त को कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार किया और मेडिकल कॉलेज प्रशासन तथा मीडिया के समक्ष कंपनी पर कई माह का मानदेय रोकने के आरोप लगाए। कंपनी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे उसकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य बताया है।
प्रबंधन ने कार्य बहिष्कार को गंभीर अनुशासनहीनता करार देते हुए कहा कि बिना पूर्व लिखित सूचना के अचानक काम बंद करने से ऑपरेशन थिएटर, लैब और इमरजेंसी जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। कंपनी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सीधे मरीजों से जुड़ी होने के कारण इस तरह का कार्य बहिष्कार स्वीकार्य नहीं है।
कंपनी के मुताबिक मानदेय भुगतान में किसी तरह की बैंक या तकनीकी समस्या होने पर कर्मचारी बैंक स्टेटमेंट के साथ लखनऊ स्थित कार्यालय अथवा स्थानीय सुपरवाइजर से संपर्क कर सकते थे। प्रबंधन का आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से समस्या का समाधान कराने के बजाय कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से काम बंद करने का रास्ता अपनाया।
कारण बताओ नोटिस में कर्मचारियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि कथित रूप से कंपनी पर गलत आरोप लगाने, अनुशासनहीनता करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर सेवा अनुबंध की शर्तों के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

