रिंटू वर्मा…
पीलीभीत।जनपद की कृषि क्षमता, विशेषकर बासमती उत्पादन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बुधवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। न्यूरिया क्षेत्र के टांडा बिजैसी में वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र सह प्रदर्शन फार्म’का शिलान्यास भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद और उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने संयुक्त रूप से किया।
बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन के इस केंद्र की स्थापना से पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बासमती बीज, जैविक खेती, बीज उत्पादन, गुणवत्ता मानकों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के संबंध में प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग मिलेगा। इसे क्षेत्र में बासमती एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।
राजकीय इंटर कॉलेज, न्यूरिया कॉलोनी में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, आत्मनिर्भर और वैश्विक बाजार के अनुरूप बनाने का काम लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार का विशेष जोर किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, प्रसंस्करण एवं निर्यात को प्रोत्साहित करने तथा कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर है।
उन्होंने कहा कि पीलीभीत में बासमती उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। यह केंद्र किसानों को उत्पादन से लेकर निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, जैविक इनपुट, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के साथ निर्यात बाजारों से बेहतर जुड़ाव मिलेगा।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टांडा बिजैसी में केंद्र की स्थापना के लिए सात एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार के समन्वित प्रयासों से पीलीभीत के किसानों को आधुनिक सुविधाएं, तकनीकी प्रशिक्षण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रगति होगी।
जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार का प्रयास किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और निर्यात की पूरी श्रृंखला से जोड़ना है। इससे कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य किसानों तक पहुंच सकेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कृषि, सिंचाई, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि निर्यात के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब कृषि उत्पादन के साथ-साथ कृषि प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं विकसित कर रहा है।
प्रस्तावित केंद्र का संचालन भारत सरकार के के वित्तीय सहयोग से मेरठ के मोदीपुरम स्थित फार्म की तर्ज पर किया जाएगा। केंद्र में बासमती एवं जैविक कृषि के क्षेत्र में प्रशिक्षण, प्रदर्शन, क्षमता निर्माण, बीज संवर्धन और तकनीकी सहयोग की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
प्रदर्शन फार्म में अधिसूचित बासमती किस्मों और आधुनिक उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक खेती, जैविक इनपुट, एकीकृत कीट प्रबंधन और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन जैसी आधुनिक कृषि पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
केंद्र में स्थापित होने वाला समर्पित बीज संवर्धन केंद्र किसानों को प्रमाणिक एवं गुणवत्तापूर्ण बासमती बीज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड और प्रमाणित बीज सहित विभिन्न श्रेणियों के बीजों के उत्पादन एवं संवर्धन की गतिविधियां संचालित होंगी।
किसानों और युवाओं को बीज उत्पादन का प्रशिक्षण देकर रोजगार और उद्यमिता के अवसर विकसित करने की भी योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
केंद्र पर किसानों के साथ-साथ किसान उत्पादक संगठनों , उद्यमियों, स्टार्टअप्स, निर्यातकों और प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि निर्यात प्रक्रिया, विपणन, निर्यात मानक, गुणवत्ता तथा रासायनिक अवशेष मुक्त बासमती उत्पादन जैसे विषयों पर किसानों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
कार्यशालाओं, फील्ड प्रशिक्षण, सम्मेलनों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ा जाएगा। उद्यमियों और स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों के निर्यात के लिए क्षमता निर्माण और हैंडहोल्डिंग सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। खेत से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ऑनलाइन एवं ऑन-कॉल तकनीकी सहायता की सुविधा भी प्रस्तावित है।
राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र के सहयोग से जैविक एवं जैव-इनपुट उत्पादन तथा जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
शिलान्यास कार्यक्रम में किसानों, निर्यातकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों की बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम में लगभग 10 हजार लोगों के शामिल होने की बात कही गई। इस दौरान बासमती एवं जैविक उत्पादों से संबंधित 23 स्टॉल की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में अन्य सहभागी संस्थाओं की गतिविधियों और उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, एमएलसी सुधीर गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा, पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान, ब्लॉक प्रमुख मरौरी एवं अमरिया, नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गुरुभाग सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, पूर्व विधायक किशनलाल राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, एपिड़ा अध्यक्ष अभिषेक देव, निदेशक डॉ. रितेश शर्मा, की महाप्रबंधक विनिता सुधांशु सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी तथा कृषि एवं निर्यात क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख बासमती उत्पादक राज्यों में शामिल है और बासमती निर्यात में भी प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। जैविक उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश की संभावनाएं व्यापक हैं। ऐसे में पीलीभीत में इस केंद्र की स्थापना से बासमती एवं जैविक कृषि के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
केंद्र की स्थापना से किसानों को आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपज की गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं बासमती और जैविक कृषि से जुड़े युवाओं, एवं उद्यमियों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी विकसित होंगे।
यह परियोजना पीलीभीत को बासमती एवं जैविक कृषि के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। केंद्र के माध्यम से स्थानीय किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने के साथ पीलीभीत की कृषि पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। परियोजना का व्यापक उद्देश्य पीलीभीत के खेतों से दुनिया की थाली तक बासमती’पहुंचाने की दिशा में किसानों को उत्पादन से लेकर निर्यात तक एक मजबूत मंच उपलब्ध कराना है।

