(एड. अंशुल गौरव सिंह)
पीलीभीत। नगर मजिस्ट्रेट/नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र) विजय वर्धन तोमर के न्यायालय ने एक अहम आदेश पारित करते हुए तरन्नुम जहाँ एवं शाज़िया आरिफ के विरुद्ध दी गई शिकायत को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं तथा साक्ष्यों के अभाव में टिकाऊ नहीं हैं।
क्या था पूरा मामला
मामला शहर के मोहल्ला बड़ा खुदागंज स्थित गाटा संख्या 789/2 से जुड़ा था। आवेदिका श्रीमती तरन्नुम जहाँ ने उक्त भूमि पर भवन निर्माण हेतु मानचित्र स्वीकृत कराया था। इसके विरुद्ध रिजवान खाँ ने आपत्ति दर्ज कराते हुए भूमि को अपनी बताते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैनामा कराने का आरोप लगाया था।
अधिवक्ताओं की प्रभावी पैरवी
तरंन्नुम जहाँ एवं शाज़िया आरिफ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुल गौरव सिंह तथा अधिवक्ता फैज़ान अली ख़ान ने न्यायालय में मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने साक्ष्यों के माध्यम से बताया कि विवादित संपत्ति का स्वामित्व सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के वर्ष 2014 के निर्णय व डिक्री से पहले ही तय हो चुका है। साथ ही उपजिलाधिकारी सदर की आख्या में यह भी स्पष्ट है कि राजस्व अभिलेखों में भूमि विभाजन को लेकर शिकायतकर्ता के दावे तकनीकी रूप से गलत हैं। सरकारी भूमि बेचने व अवैध कॉलोनी बसाने के आरोपों के समर्थन में भी कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
न्यायालय का स्पष्ट आदेश
उभयपक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने पाया कि तरन्नुम जहाँ के पास वैध स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। नगर मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर ने अपने आदेश में कहा कि रिजवान खाँ की शिकायत साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार योग्य नहीं है, इसलिए इसे निरस्त किया जाता है।
फैसले के बाद तरन्नुम जहाँ के पक्ष में खुशी का माहौल है। विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उन लोगों के लिए नजीर बनेगा जो विकास कार्यों में बाधा डालने के उद्देश्य से निराधार शिकायतें दर्ज कराते हैं।

