(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय क्षमता विकास कार्यशाला का समापन बुधवार को वृत्त कार्यालय के वन सभागार में हुआ।आयोजित इस कार्यशाला में वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम में मनीष सिंह प्रभागीय वनाधिकारी, पीटीआर, भरत कुमार डी.के. प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, , हिमांशु वाबले डीएफओ प्रशिक्षु, पीटीआर, रमेश चौहान उप प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत/पूरनपुर सहित अनेक अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इसके अलावा शैलेन्द्र सिंह डायरेक्टर, टीएसए फाउंडेशन सुरेश सी. यादव एडवोकेट, वन्यजीव काउंसिल बहराइच, उदय सतरबला होप एंड वियॉन्ड, जयपुर, डॉ. योगेश प्रताप सिंह वन्यप्राणी उद्यान, गोरखपुर, डॉ. मुदित गुप्ता (WWF इंडिया), रमेश सिंह वाइल्डलाइफ वार्डन, दुधवा, डॉ. अरुणिमा सिंह, हर्षित सिंह सहित दोनों वन प्रभागों के क्षेत्रीय वनाधिकारी एवं अग्रिम पंक्ति के फील्ड कर्मचारी मौजूद रहे।
आधुनिक रेस्क्यू तकनीकों पर विशेष जोर
कार्यशाला में डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने वन्यजीवों एवं सरीसृपों के आधुनिक तरीकों से सफल रेस्क्यू, उनकी पहचान तथा घायल वन्यजीवों के उपचार की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फील्ड स्टाफ को व्यवहारिक प्रशिक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
वन अपराधों पर कानूनी जानकारी
वन्यजीव अधिवक्ता सुरेश चन्द्र यादव ने वन अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए विभिन्न वन अधिनियमों और धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सख्त कानूनी कार्रवाई और साक्ष्य संकलन की सही प्रक्रिया से वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
संरक्षण एवं प्रबंधन पर विशेषज्ञों के व्याख्यान
अन्य विशेषज्ञों ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों पर अपने विचार साझा किए। उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से संरक्षण की नवीन रणनीतियों से अवगत कराया गया।
अंत में कार्यशाला में सहभागिता करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसके साथ ही दो दिवसीय क्षमता विकास कार्यशाला का विधिवत समापन किया गया।


