पीलीभीत टाइगर रिजर्व का इको सेंसटिव जोन घोषित… 2 किमी दायरे में निर्माण और उद्योगों पर रोक।

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रिंटू वर्मा…

 

 

 

 

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्र को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने रिजर्व की वन सीमा से किलोमीटर तक के क्षेत्र को इको सेंसटिव जोन घोषित करते हुए इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इस निर्णय के बाद अब इस दायरे में पक्कादो निर्माण, औद्योगिक गतिविधियां और बड़े वाणिज्यिक प्रतिष्ठान स्थापित नहीं किए जा सकेंगे, हालांकि तय मानकों के अनुसार पर्यटन गतिविधियों जैसे होम स्टे और सीमित होटल विकास की अनुमति दी जा सकेगी।

जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी और उत्तराखंड के तराई पूर्वी वन प्रभाग की सुरई रेंज से सटा यह टाइगर रिजर्व देश-दुनिया में अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। तराई क्षेत्र में फैले इस रिजर्व में नदियां, जलाशय और घास के मैदान तृणभोजी वन्यजीवों और बाघों के लिए आदर्श आवास प्रदान करते हैं।

टाइगर एस्टीमेशन रिपोर्ट 2022 के अनुसार यहां 71 से अधिक बाघ पाए गए थे। करीब 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस रिजर्व के लिए फरवरी 2025 में इको सेंसटिव जोन का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।

दो किमी दायरे में इन गतिविधियों पर रहेगा प्रतिबंध

जारी अधिसूचना के अनुसार इको सेंसटिव जोन में कई गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण रहेगा—

  • नए होटल, रिसॉर्ट और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के निर्माण पर रोक
  • औद्योगिक इकाइयों और बड़ी परियोजनाओं की स्थापना प्रतिबंधित
  • आरा मिल, ईंट भट्टों और खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध
  • भूमि उपयोग में बड़े बदलाव पर रोक
  • निजी भूमि पर पेड़ काटने के लिए विभाग की अनुमति आवश्यक
  • लकड़ी के ईंधन का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित

हालांकि भारत-नेपाल और उत्तराखंड सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों में शून्य किलोमीटर इको सेंसटिव जोन घोषित किया गया है।

2014 में मिला था टाइगर रिजर्व का दर्जा

पीलीभीत के जंगल को जून 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।

  • कुल क्षेत्रफल — 73,024.98 हेक्टेयर
  • कोर क्षेत्र — 60,279.80 हेक्टेयर
  • बफर क्षेत्र — 12,745.18 हेक्टेयर
  • जंगल की चौड़ाई — 2 से 15 किमी तक
  • अनाधिकृत निर्माण पर होगी सख्त कार्रवाई

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया

“इको सेंसटिव जोन में ध्वनि, वायु और मानवजनित प्रदूषण पर नियंत्रण रहेगा। होटल और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए निर्धारित मानकों का पालन कराया जाएगा। गजट में 41 बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और अनाधिकृत निर्माण पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम

इको सेंसटिव जोन घोषित करने का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा करना और आसपास के संवेदनशील पर्यावरण को बचाना है। इस फैसले से जहां बाघों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, वहीं नियंत्रित पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे।


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