रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को जिले भर के परिषदीय शिक्षक और शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में बीएसए कार्यालय पहुंचे। दोपहर करीब एक बजे के बाद एकत्र हुए शिक्षकों ने शाम चार बजे तक सांकेतिक धरना दिया। इसके बाद कचहरी पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा। ज्ञापन में वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
15–20 साल सेवा के बाद टीईटी थोपना अन्यायपूर्ण: शिक्षक
धरने को संबोधित करते हुए शिक्षकों ने कहा कि 15 से 20 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब टीईटी परीक्षा थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टीईटी का अस्तित्व वर्ष 2011 से है, ऐसे में इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू करना उचित नहीं है। शिक्षकों ने केंद्र सरकार से संसद में कानून बनाकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग की। शिक्षकों का कहना था कि जब उनकी नियुक्ति हुई, तब निर्धारित सभी योग्यताओं को पूरा करने के बाद ही उन्हें नियुक्त किया गया था, फिर अब उनकी योग्यता पर सवाल उठाना गलत है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का किया विरोध
शिक्षकों ने बताया कि एक सितंबर 2025 से उच्चतम न्यायालय द्वारा सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने की बात कही गई है, जिसका शिक्षक समाज एकजुट होकर विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद अचानक इस तरह की अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों के सम्मान के साथ अन्याय है।
शिक्षक नेताओं ने सम्मान की रक्षा का लिया संकल्प
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष दयाशंकर गंगवार ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान सर्वोपरि है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष लालकरन ने कहा कि जो शिक्षक समाज को जागरूक करता है, उसी की योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
शिक्षक पदाधिकारी अनीता तिवारी ने कहा कि शिक्षकों पर कोई भी अनुचित आदेश लागू किया जाएगा तो शिक्षक एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। यूटा के जिला मंत्री मो. अकरम ने सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की।
बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद
धरने में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के भद्रपाल गंगवार, उमेश गंगवार, विमल कुमार, नंद किशोर गंगवार, मियां मनाजिर, अंकित भारती, चंद्रशेखर गंगवार, निरंजना शर्मा, देवेंद्र कन्हैया, सतेंद्र गंगवार, निधि निगम, रश्मि तिवारी, नीरज पाल सिंह, जितेंद्र कुमार, मुकेश अवस्थी, मोईन अहमद, रोहित कुमार, पुष्पेंद्र गंगवार, के.के. सागर, मीना, अर्चना राणा, मुनींद्र पाल सिंह, डॉली यादव, राजेश मिश्रा, हेमराज भारती सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

