पीलीभीत।75 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति को सांड के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। आंतरिक चोटें गंभीर थीं, इसलिए चिकित्सकों ने तुरंत एक्सप्लोरेटरी लैप्रोटॉमी कर जानलेवा क्षति को नियंत्रित किया।
आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम ने बताया कि , वृद्ध मरीजों की रिकवरी युवा मरीजों की तुलना में अधिक जटिल होती है। उम्रदराज शरीर को शल्यक्रिया के बाद होने वाले शारीरिक तनाव से उबरने के लिए नियंत्रित वातावरण और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इसी सोच के साथ मरीज के उपचार में आधुनिक ईआरएएस प्रोटोकॉल अपनाया गया, जो शल्यक्रिया के बाद शीघ्र और सुरक्षित रिकवरी पर केंद्रित बहु-विषयक पद्धति है।बड़ी सर्जरी और एनेस्थीसिया के बाद वृद्ध मरीजों में भ्रम की स्थिति ( सामान्य है। टीम ने अतिरिक्त सिडेशन देने के बजाय ‘री-ओरिएंटेशन’ रणनीति अपनाई—दिन-रात की नियमित दिनचर्या, परिजनों की उपस्थिति और आईसीयू के शोर को नियंत्रित करना। इससे मरीज की मानसिक स्थिति जल्दी सामान्य हुई और वे फिजियोथेरेपी में सक्रिय रूप से शामिल हो सके
सर्जरी के बाद मरीज को कुछ समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता रही। फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर बनाए रखने के लिए उन्हें इंसेंटिव स्पाइरोमेट्री सिखाई गई। इस तकनीक से गहरी सांस लेने की आदत विकसित हुई, जिससे फेफड़ों के सिकुड़ने (एटलेक्टेसिस) का खतरा कम हुआ और ऑक्सीजन पर निर्भरता घटती गई।
बिस्तर से बाहर—रिकवरी की ओर कदम
ईआरएएस प्रोटोकॉल के तहत लंबे समय तक बिस्तर पर आराम की पारंपरिक धारणा से हटकर मरीज को जल्दी बैठने और छोटे-छोटे कदम चलने के लिए प्रेरित किया गया। इससे रक्त के थक्के बनने का जोखिम घटा और पाचन तंत्र की सामान्य क्रिया शीघ्र बहाल हुई। परिजनों को घर पर वॉकर जैसे सहायक उपकरणों के सुरक्षित उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया गया।
संतुलित दर्द प्रबंधन और पोषण
मरीज के लिए मल्टीमोडल एनाल्जीसिया अपनाई गई, जिससे अलग-अलग दवाओं के संतुलित प्रयोग से दर्द नियंत्रित रहा और भारी सिडेटिव की जरूरत नहीं पड़ी। साथ ही घाव भरने और मांसपेशियों की कमजोरी रोकने के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट युक्त आहार दिया गया।
अनावश्यक दवाओं से परहेज
वृद्ध मरीजों में पॉलीफार्मेसी गंभीर समस्या बन सकती है। चिकित्सकों ने दवा सूची की सावधानीपूर्वक समीक्षा कर अनावश्यक दवाएं हटाईं, जिससे चक्कर, भ्रम और अन्य दुष्प्रभावों का जोखिम कम हुआ।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ सर्जरी करना नहीं, बल्कि मरीज को स्वस्थ और आत्मनिर्भर अवस्था में उनके परिवार के पास लौटाना है।”
आईसीयू टीम की सतर्क निगरानी, आधुनिक उपचार पद्धति और मरीज की मजबूत इच्छाशक्ति ने यह साबित कर दिया कि समुचित देखभाल और समन्वित प्रयास से उम्र कभी भी स्वस्थ जीवन में बाधा नहीं बनती।

