पीलीभीत टाइगर रिजर्व की गोद में बसा सप्त सरोवर,प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम। जाने कैसे पहुँचे यहाँ तक?

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पीलीभीत। बाघों के प्राकृतिक आवास के लिए प्रसिद्ध  उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में पर्यटन सत्र शुरू होते ही देश-विदेश के सैलानियों की आवाजाही बढ़ गई है। इस बार पर्यटकों का ध्यान केवल ‘मिनी गोवा’ चूका बीच पर ही नहीं, बल्कि सप्त सरोवर नामक नये विकसित टूरिज्म स्पॉट पर भी तेजी से आकर्षित हो रहा है। ब्रिटिशकालीन विरासत, प्राकृतिक खूबसूरती और किफायती सुविधाओं ने इसे सैलानियों की पहली पसंद बना दिया है।


पर्यटन सत्र में बढ़ती रौनक

पीलीभीत टाइगर रिजर्व का हरा-भरा जंगल और इको-टूरिज्म की बेहतरीन सुविधाएँ हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। पर्यटन सत्र के शुरू होते ही चूका बीच सहित पूरा क्षेत्र फिर से गुलजार होने लगा है। इसी के साथ सैलानी अब नए और शांत स्थल सप्त सरोवर की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।


सप्त सरोवर: प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम

घने जंगलों से घिरे सप्त सरोवर को पिछले वर्ष 167.90 लाख रुपये खर्च कर एक पूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। सुबह की ताजी हवा, पक्षियों का मधुर कलरव और रात के सन्नाटे में गूंजती बाघों की दहाड़ यहां आने वाले हर पर्यटक के लिए रोमांचक अनुभव बन जाती है।


ब्रिटिशकाल की सात झाल से बना आधुनिक ‘सप्त सरोवर’

कभी सात झाल के नाम से जानी जाने वाली यह जगह एक पुरानी नहर का अवशेष है जिसे ब्रिटिश हुकूमत ने 1926 में बाइफरकेशन परियोजना के दौरान बनवाया था।
1951 में शारदा सागर डैम बनने के बाद यह नहर बंद कर दी गई और आज जो सात छोटे-छोटे जलकुंड दिखाई देते हैं, वही सात झीलें मिलकर ‘सप्त सरोवर कहलाती हैं। स्थानीय जन बताते हैं कि इस निर्माण कार्य में उस दौर के बंदियों का भी उपयोग किया गया था।


कम बजट में बेहतरीन ठहराव सुविधाएँ

सप्त सरोवर की सबसे विशेष बात इसकी पॉकेट-फ्रेंडली सुविधाएँ हैं। यहां पर्यटक केवल 2000 से 3000 रुपये खर्च कर टेंट हट्स, वुडेन हट्स और ग्रीन हट्स में रात्रि विश्राम कर सकते हैं।
यहां उपलब्ध सुविधाएँ—

  • टेंट हट
  • वुडेन हट
  • ग्रीन हट
  • कैंपस में पारंपरिक भोजन वाली कैंटीन
  • सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण

कैंटीन में मिलने वाला शुद्ध बंगाली भोजन, खासकर सुबह की गरमा-गरम पकौड़ियाँ, पर्यटकों को खूब पसंद आ रही हैं।


सेल्हा पर्यटन गांव: होम स्टे का बढ़ता ट्रेंड

सप्त सरोवर के समीप स्थित सेल्हा गांव को टूरिज्म विलेज मॉडल पर विकसित किया गया है। यहां उपलब्ध होम स्टे में सैलानी केवल 1000 रुपये में रात्रि विश्राम कर सकते हैं।
यह व्यवस्था न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार का नया अवसर भी बना रही है।


सांस्कृतिक अनुभव और शारदा डैम का सनसेट व्यू

सप्त सरोवर आने वाले पर्यटक केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं बल्कि बंगाली संस्कृति और खानपान का भी अनुभव लेते हैं। वहीं पास ही स्थित शारदा सागर डैम का सनसेट व्यू पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बन गया है। जल के शांत विस्तार में डूबते सूर्य का दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।


सप्त सरोवर तक पहुंचने का मार्ग

यहां पहुंचने के लिए सैलानियों को शारदा डैम से होते हुए सेल्हा गांव तक जाना होता है। गांव में वाहन पार्किंग उपलब्ध है, जिसके बाद पर्यटकों को पैदल ट्रैक के जरिए सप्त सरोवर तक पहुंचना होता है। जंगल के बीच यह पैदल रास्ता रोमांच को और बढ़ा देता है।


पर्यटन विभाग की ओर से की जा रही पहल

पर्यटन सीजन में बढ़ती मांग को देखते हुए इस क्षेत्र में लगातार नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह के अनुसार
“कम बजट में शानदार और सुरक्षित ठहराव के लिए सप्त सरोवर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहां विकसित की गई सुविधाएँ पर्यटकों को नई दिशा दे रही हैं।

 


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