रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के शिशु रोग विभाग ने एक अत्यंत दुर्लभ एवं चुनौतीपूर्ण बीमारी ‘फार्स सिंड्रोम’ का सफलतापूर्वक निदान एवं उपचार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह बीमारी बेहद कम मामलों में पाई जाती है, जिसकी घटना दर लगभग 10 लाख में 1 मानी जाती है।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची बालिका
सात वर्षीय बालिका को तेज बुखार, असामान्य शारीरिक हरकतों (दौरे) तथा अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया। मरीज की स्थिति गंभीर थी, जिसे देखते हुए चिकित्सकों ने तुरंत उपचार शुरू किया।
आपातकालीन उपचार से मिली राहत
चिकित्सकों ने प्रारंभिक उपचार के तहत मरीज को ऑक्सीजन, दौरा-रोधी दवाएं, जीवाणुरोधी दवाएं एवं अन्य आवश्यक चिकित्सा दी। उपचार का असर दिखा और अगले ही दिन बालिका की चेतना में सुधार होने लगा।
जांच में हुआ फार्स सिंड्रोम का खुलासा
विस्तृत जांच के दौरान रक्त परीक्षण, इलेक्ट्रोलाइट्स, थायरॉइड प्रोफाइल सहित अन्य आवश्यक जांचें कराई गईं। एनसीसीटी हेड जांच में मस्तिष्क के बेसल गैंग्लिया में कैल्सीफिकेशन पाया गया, जिससे ‘फार्स सिंड्रोम’ की पुष्टि हुई।
विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ उपचार
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित सचान ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम द्वारा समुचित दवाओं और सतत निगरानी के माध्यम से मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। उपचार के दौरान दृष्टि संबंधी शिकायत पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से भी परामर्श कराया गया।
आगे की जांच और फॉलो-अप की सलाह
मरीज को आगे की विस्तृत जांच के लिए एमआरआई ब्रेन एवं ऑर्बिट कराने की सलाह दी गई। पूर्ण रूप से स्थिर होने के बाद बालिका को दौरा-रोधी दवाओं और कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ डिस्चार्ज कर दिया गया तथा आगे के इलाज के लिए उच्च केंद्र पर रेफर किया गया।
प्राचार्या ने टीम की सराहना की
इस सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने शिशु रोग विभाग की टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञता का प्रमाण है।
क्षेत्र के लिए गर्व का विषय
यह उपलब्धि न केवल पीलीभीत जनपद बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। इससे यह साबित होता है कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में जटिल एवं दुर्लभ बीमारियों का भी सफल उपचार संभव है।

