मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में रविवार को 540 हिन्दू जोड़ों का हुआ पवित्र मिलन, 32 मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह।

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पीलीभीत। सामाजिक समरसता, समानता और जनकल्याण की मिसाल बन चुका मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह आज पीलीभीत में एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। जिला प्रशासन की देखरेख में रविवार को ड्रमंड इंटर कॉलेज मैदान में भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कुल 572 जोड़े पवित्र जीवन बंधन में बंधे। इनमें से 32 मुस्लिम जोड़ों का आज निकाह हुआ, जबकि अन्य हिन्दू जोड़े सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। मुख्य अतिथि बीसलपुर विधायक ने कार्यक्रम में पहुंचकर वर वधुओ को विवाह की शुभकामनायें दी।
यह आयोजन प्रदेश सरकार की उन योजनाओं में से एक है जो कमजोर आर्थिक वर्ग को मजबूती देने और सामाजिक खर्च के बोझ को कम करने के उद्देश्य से विशेष रूप से चलाई जाती हैं। सामूहिक विवाह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द, समानता और एकजुटता का संदेश भी देता है।

बीसलपुर और बिलसंडा क्षेत्र के जोड़ों का आज विवाह सम्पन्न

आज के कार्यक्रम की विशेषता यह है कि *बीसलपुर और बिलसंडा क्षेत्र के अधिकांश जोड़े सामूहिक विवाह में शामिल होने के लिए सुबह से ही मैदान पहुंचने लगे थे। प्रशासन द्वारा जोड़ों और उनके परिजनों के बैठने, खाने-पीने और आवागमन की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई थी।
समारोह के लिए बनाई गई व्यवस्था में वर-वधुओं के एक प्रवेश से लेकर मंडप तक पहुँचने तक के पूरे मार्ग को व्यवस्थित और सुरक्षित रखा गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात है और क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से सम्पन्न हो सके।

बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए लगाए गए 10 स्टॉल

विवाह समारोह को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन की ओर से 10 बायोमेट्रिक स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर सभी वर-वधुओं का बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया था।
यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है कि सभी जोड़े वास्तविक हों और किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो सके।
जोड़ों के पंजीकरण से लेकर विवाह मंच तक की संपूर्ण प्रक्रिया में तकनीकी सहायता का उपयोग करके इसे सरल बनाया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस बार बायोमेट्रिक स्टॉल बढ़ाए गए हैं ताकि भीड़ पर नियंत्रण रखा जा सके और किसी को भी लंबा इंतजार न करना पड़े।

12 और 15 नवंबर के पूर्व आयोजित विवाह समारोहों का विवरण

पीलीभीत में इससे पहले भी दो बड़े सामूहिक विवाह समारोह सम्पन्न हो चुके हैं, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए और सैकड़ों जोड़े विवाह बंधन में बंधे।

12 नवंबर का आयोजन

* कुल विवाह हुए: 484 जोड़े
* इनमें मुस्लिम जोड़े: 12
इस आयोजन को काफी सराहना मिली और अधिकांश जोड़े समय से मंच पर पहुंचकर विवाह सम्पन्न कर पाए।

15 नवंबर का भव्य आयोजन

* कुल प्रस्तावित जोड़े: 492
* प्रस्तावित मुस्लिम जोड़े: 132
* उपस्थित हिंदू जोड़े: 300
* उपस्थित मुस्लिम जोड़े: 100

निर्धारित संख्या के सापेक्ष कुछ जोड़े कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके, लेकिन उपस्थित *400 जोड़ों का विवाह विधिवत सम्पन्न कराया गया। मंच पर हिंदू जोड़ों के लिए अलग-अलग मंडप बनाए गए थे, वहीं मुस्लिम समुदाय के जोड़ों के लिए योजना के अनुसार निकाह की व्यवस्था की गई थी।
इन कार्यक्रमों की सफलता और व्यवस्थित संचालन को देखते हुए आज के समारोह के लिए भी प्रशासन ने पूरी तैयारी की है।

 

दहेज सामग्री के लिए बनाया गया भव्य स्टॉल

सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत नवविवाहित जोड़ों को दहेज सामग्री भी प्रदान की जाती है, जिसके लिए मैदान में एक भव्य स्टॉल तैयार किया गया है। इस स्टॉल पर गृहस्थी की आवश्यक वस्तुएँ जैसे बिस्तर बर्तन सेट किचन सामान पंखा
आवश्यक घरेलू उपकरण आदि सामग्री जोड़े को विवाह के तुरंत बाद प्रदान की जाती है। दहेज सामग्री वितरण का यह उपक्रम सरकार की ओर से गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को सहयोग देने के उद्देश्य से किया जाता है।

सामूहिक विवाह योजना: सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि यह सामाजिक समरसता की एक जीवंत मिसाल बन चुकी है। एक ही मंच पर अलग-अलग समुदायों के जोड़ों का विवाह सम्पन्न होना यह संदेश देता है कि विविधता में एकता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
इसके अतिरिक्त सामूहिक विवाह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अत्यंत राहतकारी साबित होता है। विवाह जैसे महत्त्वपूर्ण संस्कार में जहां लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, वहीं यह योजना परिवारों को बिना किसी आर्थिक बोझ के सुगमता से वैवाहिक जीवन की ओर अग्रसर करती है।

रविवार का आयोजन: उत्साह और खुशियों का संगम

रविवार को ड्रमंड इंटर कॉलेज मैदान उत्साह, आनंद और उत्सव से भरा हुआ दिखाई दिया। संगीत, मैवाहिक मंडपों की सजावट, मंच की भव्यता और नवदंपतियों की मुस्कान—ये सब मिलकर इस आयोजन को यादगार बनाया।प्रशासनिक अधिकारियों, जिले के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार आयोजन की निगरानी की जा रही है ताकि हर जोड़े को सम्मानजनक तरीके से विवाह सम्पन्न कराने का अवसर मिल सके।

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