रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। शिक्षा और सम्मान के जरिए बेटियों का हौसला बढ़ाने की एक अनूठी पहल बुधवार को पीलीभीत में देखने को मिली। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रोशनी सिंह ने दो दिव्यांग छात्राओं को अपने कार्यालय में सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर उन्हें एक दिन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी की कुर्सी पर बैठाया। बीएसए की कुर्सी पर बैठते ही दोनों छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। इस दौरान उनके माता-पिता भी मौजूद रहे और अपनी बेटियों को बीएसए की कुर्सी पर बैठा देखकर बेहद भावुक और गौरवान्वित नजर आए।
बीएसए कार्यालय में दोनों छात्राओं का स्वागत पूरे सम्मान के साथ किया गया। कार्यालय के सभी कर्मचारी और अधिकारी इस विशेष अवसर के साक्षी बने। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रोशनी सिंह ने दोनों छात्राओं को माला पहनाकर सम्मानित किया और उपहार भेंट किए। इसके बाद उन्हें अपनी कुर्सी पर बैठाकर कुछ समय के लिए बीएसए की जिम्मेदारी का अनुभव कराया।
‘कैसा लग रहा है?’—बीएसए के सवाल पर मुस्कुराकर बोलीं छात्राएं, ‘बहुत अच्छा’
बीएसए रोशनी सिंह ने दोनों छात्राओं से बातचीत करते हुए पूछा कि बीएसए की कुर्सी पर बैठकर उन्हें कैसा महसूस हो रहा है। इस पर दोनों छात्राओं ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया—‘बहुत अच्छा लग रहा है।’ छात्राओं की खुशी देखकर कार्यालय में मौजूद स्टाफ के चेहरे पर भी मुस्कान दिखाई दी।
बीएसए ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि वे खूब पढ़ें, मेहनत करें और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ती रहें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता किसी भी बच्चे की प्रतिभा और क्षमता के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। बच्चों को प्रोत्साहन और अवसर मिलने से उनका आत्मविश्वास और मजबूत होता है।
कक्षा चार की मीना ने संभाली बीएसए की कुर्सी
इस विशेष पहल में पहली छात्रा मीना रहीं। मोहल्ला सरफराज खान, पीलीभीत निवासी पप्पू की बेटी मीना पीलीभीत नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भीमसेन ब्रजरानी में कक्षा चार की छात्रा है। मीना के साथ उनकी माता ज्योति भी बीएसए कार्यालय पहुंचीं। बेटी को सम्मान के साथ बीएसए की कुर्सी पर बैठते देखकर ज्योति काफी उत्साहित और खुश नजर आईं।
कक्षा दो की तारावती भी बनीं एक दिन की बीएसए
दूसरी छात्रा तारावती अमरिया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय उगनपुर में कक्षा दो में पढ़ती हैं। तारावती के पिता वेद प्रकाश भी इस मौके पर मौजूद रहे। अपनी बेटी को बीएसए की कुर्सी पर बैठा देखकर उन्होंने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि बेटी को इस तरह सम्मान मिलते और बीएसए की कुर्सी पर बैठते देखकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है।
माता-पिता बोले—बेटियों का बढ़ा आत्मविश्वास
दोनों छात्राओं के माता-पिता के लिए यह पल बेहद खास रहा। अपनी बेटियों को अधिकारियों के बीच सम्मान पाते और बीएसए की कुर्सी पर बैठे देखकर उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। परिजनों ने बीएसए रोशनी सिंह की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अवसर दिव्यांग बच्चों के भीतर आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
सम्मान के साथ मिला आगे बढ़ने का संदेश
बीएसए रोशनी सिंह की इस पहल को केवल औपचारिक सम्मान के तौर पर नहीं, बल्कि दिव्यांग छात्राओं के मन में ‘हम भी कुछ कर सकते हैं’ का विश्वास पैदा करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। एक दिन के लिए बीएसए की कुर्सी पर बैठीं मीना और तारावती के चेहरे की खुशी और उनके माता-पिता का उत्साह इस पहल की सार्थकता बयां करता नजर आया।

