पीलीभीत टाइगर रिज़र्व ने रचा था इतिहास : 13 देशों को पछाड़कर मिला था नंबर वन का दर्जा। बाघ संरक्षण से लेकर विदेशी सैलानियों की बढ़ती संख्या तक बना मिसाल।

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पीलीभीत। उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिज़र्व देश ही नहीं आज पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। बाघों के संरक्षण और उनकी संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि को देखते हुए वर्ष 2020 को पीलीभीत टाइगर रिज़र्व को इंटरनेशनल सेव टाइगर कैंपेन के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय टीएक्स-2 अवॉर्ड (TX-2 Award) से सम्मानित किया गया था। इस सम्मान के साथ पीलीभीत ने दुनिया के 13 देशों को पीछे करते हुए बाघों की सबसे तेज वंशवृद्धि का रिकॉर्ड कायम किया था।यह पुरस्कार उन टाइगर रिज़र्व को दिया जाता है जिन्होंने चार वर्षों में बाघों की संख्या को दोगुना या उससे अधिक करने में सफलता पाई हो। पीलीभीत ने इस मानदंड पर खरा उतरते हुए विश्व भर में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की थी।

चार वर्षों में 25 से बढ़कर 65 हुए थे बाघ

साल 2014 में जब पीलीभीत को आधिकारिक रूप से टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया था, तब यहां बाघों की संख्या केवल **25** थी। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइन पर तेजी से काम शुरू हुआ। बाघों की सुरक्षा, आवास क्षेत्र का विस्तार, शिकार की रोकथाम और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली से यहां के जंगलों में बाघों का संरक्षण बेहद सफल रहा।
इन प्रयासों का नतीजा यह रहा कि वर्ष 2018 में की गई गणना में बाघों की संख्या बढ़कर 65 हो गई। वर्तमान में पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में 85 से अधिक बाघ निवास कर रहे हैं, जो इसे देश के सबसे सफल टाइगर संरक्षण क्षेत्रों में शुमार करता है।
यह उपलब्धि न केवल पीलीभीत बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि बाघ संरक्षण को लेकर भारत विश्व के अग्रणी देशों में गिना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दी बधाई, मिला वैश्विक सम्मान

दिल्ली से आयोजित एक वर्चुअल समारोह में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) और इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा पीलीभीत टाइगर रिज़र्व को दुनिया में नंबर वन घोषित किया गया।
इस समारोह में विभाग के प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) सुनील पांडेय को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया, जिसने पूरे राज्य का गौरव बढ़ाया।इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा नेपाल, भूटान, रूस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित कुल 13 देशों में टाइगर मॉनीटरिंग की गई। इस विस्तृत अध्ययन के बाद पाया गया कि सबसे तेजी से बाघों की संख्या में वृद्धि पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में हुई।

पर्यटन का नया केंद्र बना पीलीभीत टाइगर रिज़र्व

बाघ संरक्षण में सफलता के साथ-साथ पीलीभीत टाइगर रिज़र्व अब पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या हर वर्ष तेजी से बढ़ रही है। जंगल सफारी, प्राकृतिक सौंदर्य, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और वन्यजीव यहां की खास आकर्षण का केंद्र हैं।
पीलीभीत की तराई का अनोखा भू–आकृति विज्ञान और शांत प्राकृतिक वातावरण विदेशी नागरिकों को आकर्षित कर रहा है।

विदेशी सैलानियों की संख्या नई ऊंचाइयों पर

सालदर साल विदेशी सैलानियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी यह साबित करती है कि पीलीभीत टाइगर रिज़र्व अब अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म का केंद्र बन चुका है।

पर्यटन सत्रवार   विदेशी पर्यटकों की संख्या

* 2014–15 : 10
* 2015–16 : 13
* 2016–17 : 15
* 2017–18 : 16
* 2018–19 : 23
* 2019–20 : 13
* 2020–21 : 02
* 2021–22 : 07
* 2022–23 : 54
* 2023–24 :189
* 2024–25 : 452

सत्र 2024–25 में विदेशी नागरिकों की संख्या बढ़कर 452 हो गई, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि पीलीभीत विश्वभर के पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनता जा रहा है।

देश सहित विश्व में वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बनकर उभरेगा पीलीभीत टाइगर रिजर्व

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व ने बाघ संरक्षण में वैश्विक स्तर पर जो पहचान बनाई है, वह अन्य देशों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण है। बाघों की संख्या में तेज़ वृद्धि और विदेशी सैलानियों का बढ़ता रुझान यह सिद्ध करता है कि पीलीभीत न केवल एक सफल टाइगर रिज़र्व है बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी अपनी मजबूत जगह बना चुका है।आगे आने वाले वर्षों में यह रिज़र्व न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बनकर उभरेगा।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व इस लिए जाना जाता है-

पीलीभीत टाइगर रिजर्व टाइगर साइटिंग सहित टूरिस्ट स्पॉट के लिए सैलानियों के बीच लोकप्रिय हैं। शारदा सागर डैम के एक छोर पर बना इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच सूर्योदय के वक्त अपने खूबसूरत नज़ारे के लिए जाना जाता है। खूबसूरत चूका बीच प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंदीदा जगहों में से एक है। दूसरा टूरिज्म डेस्टीनेशन चूका बीच से लगा 22 किमी में फैला शारदा सागर डैम है। इसके एक तरफ उत्तराखंड से जोड़ने वाली सड़क है। डैम के किनारे बनी यह सड़क सन सेट व्यू के शौकीनों की पहली पसंद हैं। इसी के पास टाइगर रिजर्व एक अन्य प्रसिद्ध टूरिज्म स्पॉट सप्त सरोवर भी हैं। यहां सैलानी नाइट कैंपिंग का आनंद ले सकते हैं। यहीं से सैलानी बिट्रिशकाल में बने बाइफरकेशन भी भी जा सकते हैं। यहां नहरों का जाल फैला हुआ है। इसके अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सैलानी भीमताल, पायथन प्वाइंट, साइफन कैनाल, क्रोकोडाइल प्वाइंट, ओटर प्वाइंट, बारहसिंघा ताल और प्रकृति चित्रण केंद्र का भी लुत्फ उठा सकते हैं।  पीलीभीत टाइगर रिजर्व से कुछ दूरी पर लखनऊ की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली गोमती नदी का उद्गम स्थल भी है।


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