पीलीभीत :- पीलीभीत के युवा उद्योगपति और उन्नत किसान आयुष अग्रवाल इसका जीवंत प्रमाण हैं। आधुनिक तकनीक और इनोवेटिव फार्मिंग को अपनाकर उन्होंने खेती की परंपरागत परिभाषा ही बदल दी।आयुष आज दो विशाल पॉलीहाउस में रंगीन शिमला मिर्च का उत्पादन कर रहे हैं और सिर्फ पहली ही फसल में एक एकड़ क्षेत्र से 25 से 30 लाख रुपये की पैदावार हासिल कर चुके हैं।
उद्योग जगत से खेती की ओर,एक विरासत, एक जुनून
पीलीभीत राजघराने से जुड़े आयुष अग्रवाल, वर्तमान में एलएच शुगर मिल के डायरेक्टर हैं। उनके दादा स्व. राजा रामनाथ और पिता स्व. आदित्य अग्रवाल की दी हुई सीख ने उन्हें उद्योग और खेती—दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाने की प्रेरणा दी।
उद्योग जगत में मजबूती से पहचान बनाने के साथ उन्होंने खेती को परिवार की विरासत के रूप में संजोया। यही नहीं, उन्होंने खेती को आधुनिक रूप देते हुए इसे लाभकारी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया। पिछले कुछ वर्षों से शहर से लगे पकड़िया नौगवां स्थित फार्म हाउस पर वे इनोवेटिव फार्मिंग को प्रयोग और शोध के साथ आगे बढ़ाते आ रहे हैं।इसी समर्पण के चलते फरवरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उन्हें सम्मानितभी किया जा चुका है।
पहली ही फसल में बंपर उत्पादन, 300 रुपये किलो तक बिकती हैँ लाल पीली शिमला मिर्च
आयुष अग्रवाल के फार्म पर बने दोनों पॉलीहाउस प्रति एकड़ के हिसाब से तैयार किए गए हैं। शिमला मिर्च अब पूरी तरह तैयार होकर महानगरों के बाजारों में भेजी जा रही है। बाजार में कलर्ड शिमला मिर्च 100 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।
इस पूरी प्रक्रिया में ग्रोइंग मैनेजर महावीर सिंह की भी अहम भूमिका रही है।
दो एकड़ पॉलीहाउस में 50 से 60 लाख की पैदावार
फार्म पर बने दोनों पॉलीहाउस मिलाकर कुल दो एकड़ क्षेत्र में उत्पादन किया जा रहा है।
✅ प्रति एकड़ पैदावार 25–30 लाख रुपये
✅ कुल संभावित उत्पादन 50–60 लाख रुपये
30 % रंग बदलने के बाद शिमला मिर्च की हो जाती हैँ कटिंग
शिमला मिर्च जब पॉलीहाउस में 30% रंग बदल लेती है, तब उसकी कटिंग कर ली जाती हैँ। उसके बाद कटी गई शिमला मिर्च को उपयुक्त तापमान पर स्टोर रूम में रखा जाता है। जहाँ2–3 दिनों में शिमला मिर्च पूरी तरह लाल या पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
इसके बाद इसकी सप्लाई—
✅ बरेली
✅ लखनऊ
✅ दिल्ली
✅ उत्तराखंड के कई शहरों तक आपूर्ति
की जाती है।
सभी किसानों के लिए प्रेरक मॉडल
आयुष अग्रवाल का मानना है “खेती तभी लाभकारी हो सकती है, जब किसान तकनीक, बाजार की मांग और उत्पादन प्रबंधन को समझकर आगे बढ़ें।
उनका मॉडल—
✅ कम भूमि में अधिक उत्पादन
✅ सुरक्षित व नियंत्रित खेती
✅ बड़ा बाजार और बेहतर मूल्य
✅ युवा किसानों के लिए प्रेरणा
✅ कृषि को व्यवसायिक स्वरूप देने का मार्ग
उनकी यात्रा साबित करती है कि खेती केवल परंपरा नहीं—बल्कि आधुनिक, लाभकारी और सम्मानजनक व्यवसाय भी बन सकती है।


