कौन बनेगा पीलीभीत का नया भाजपा जिलाध्यक्ष? छह साल बाद फिर तेज हुई सियासी हलचल, 28 दावेदारों पर टिकी निगाहें।

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पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में भाजपा जिलाध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से चल रहा सियासी सस्पेंस एक बार फिर गहराता दिख रहा है। मौजूदा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह दो कार्यकाल—कुल छह वर्ष—सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। जनवरी माह में हुए संगठनात्मक चुनाव के दौरान 28 दावेदारों ने आवेदन कर इस मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया था, लेकिन हाईकमान की घोषणा लंबित रहने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब दिसंबर में एक बार फिर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है और शहर से लेकर गांव तक चर्चा सिर्फ एक—पीलीभीत का नया जिलाध्यक्ष आखिर कौन?

घोषणा का इंतजार… जनवरी से दिसंबर तक जारी सस्पेंस

साल 2025 की शुरुआत में ही भाजपा की संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई थी। मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों की घोषणा के बाद जिलाध्यक्ष पद के लिए नामांकन शुरू हुआ। आठ जनवरी को नामांकन प्रक्रिया पर्यवेक्षक डॉ. एमपी सिंह आर्य और जिला चुनाव अधिकारी व एमएलसी गोपाल अंजान की देखरेख में सम्पन्न कराई गई।शुरुआत में माहौल बेहद गर्म था। दावेदारों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपने संपर्कों को मजबूत करने की कोशिश की। कई नेता महीनों तक राजधानी के चक्कर लगाते दिखे। समर्थक भी पूरे जोश में थे, सोशल मीडिया पर पोस्ट और शुभकामनाएं लगातार वायरल होती रहीं।लेकिन जब हाईकमान की ओर से घोषणा अटक गई, तो दावेदारों का उत्साह धीरे-धीरे कम होने लगा और यह चमक अचानक फीकी पड़ गई।

28 दावेदारों ने ठोकी दावेदारी, मुकाबला बना रोमांचक

जिलाध्यक्ष पद के लिए इस बार भाजपा में अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। वरिष्ठ नेताओं से लेकर युवा चेहरों और सक्रिय पदाधिकारियों तक, कुल 28 दावेदारों ने नामांकन किया। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

     गुरभाग सिंह
    लेखराज भारती
    राजेंद्र प्रसाद कश्यप
    रेखा सिंह परिहार
    दीपक कुमार अग्रवाल
     डालचंद्र वर्मा
     आयुष मिश्रा
      सुषमा देवी
     अलंकार शर्मा
     तुलाराम लोधी
    कमलेश कुमार गंगवार
    सतनाम सिंह
    सोनू वाल्मीकि
     रजनीश पांडेय
     गोकुल प्रसाद मौर्य
      दिनेश पटेल
     अमित वाल्मीकि
     मनोज कुमार गुप्ता
     नागेंद्र प्रताप सिंह
     धीरेंद्र मिश्रा
     संजीव मोहन अग्रवाल
      प्रफुल्ल मिश्रा
      रेनू राज
      हेमराज दिवाकर
     संतराम राठौर
     शरदपाल सिंह
     महादेव गाइन
    अमित अग्रवाल

इतने बड़े पैनल के सामने चयन प्रक्रिया और भी पेचीदा होती दिखाई दी, जिसने माहौल को बेहद दिलचस्प बना दिया।

फिर गर्म हुई राजनीति—सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक ‘जिलाध्यक्ष’ की चर्चा

लंबे इंतजार के बाद अब दिसंबर माह में एक बार फिर भाजपा जिलाध्यक्ष की घोषणा के संकेत तेज हुए हैं। जैसे ही पार्टी के भीतर इस पर हलचल बढ़ी, दावेदारों ने फिर से सक्रियता बढ़ा दी। कई नेताओं ने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर अपने फोटो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसे समर्थक तुरंत जिलाध्यक्ष पद से जोड़कर देखने लगे।गली–नुक्कड़ों पर चर्चा है कि हाईकमान अब लंबे इंतजार के बाद नाम तय कर सकता है। समर्थकों के बीच ‘सोशल वार’ भी देखने को मिल रहा है—हर कोई अपने नेता के पक्ष में हवा बना रहा है।

सभी की निगाहें हाईकमान पर

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि निर्णय किसी भी समय आ सकता है, जिसके बाद छह साल बाद पहली बार पीलीभीत को नया जिलाध्यक्ष मिल सकता है।
सत्ताधारी दल ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी इस घोषणा पर नजरें गड़ाए हुए हैं, क्योंकि नया जिलाध्यक्ष आगामी चुनावों की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।छह वर्ष बाद जिले में भाजपा संगठन के शीर्ष पद पर बदलाव की संभावनाओं ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। 28 दावेदारों की लंबी सूची और महीनों से चल रही रस्साकशी के बीच पीलीभीत अब सिर्फ एक सवाल का इंतजार कर रहा है—

आखिर कौन बनेगा भाजपा का नया जिलाध्यक्ष?


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