थाना घुंघचाई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। इस दौरान पुलिस ने तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया, जबकि मौके से 09 मोबाइल फोन, 02 लैपटॉप, 59,500 रुपये नकद, कई फर्जी दस्तावेज़ व अन्य सामान बरामद किया गया।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व तथा क्षेत्राधिकारी पूरनपुर के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। एनसीआरपी पोर्टल से प्राप्त साइबर अपराध व बैंक खातों की जांच के दौरान पता चला कि घुंघचाई क्षेत्र में स्थित गौरव शर्मा के जनसेवा केंद्र/बीसी प्वाइंट को संदिग्ध गतिविधियों के चलते होल्ड किया गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस को बड़ा सुराग मिला जिसने फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कराया।
मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह के पास से भारी मात्रा में सामान बरामद
सूचना मिलने पर पुलिस ने अमृतपाल सिंह पुत्र गुरप्रीत निवासी हरीपुर ता० अजीतपुर बिल्हा, थाना घुंघचाई (जनपद पीलीभीत) को गिरफ्तार किया। उसके पास से पुलिस ने निम्न सामान बरामद किए—
- 06 मोबाइल फोन
- 02 लैपटॉप (चार्जर सहित)
- 05 फर्जी आधार कार्ड की छायाप्रतियां
- 01 मूल आधार कार्ड
- 07 बैंक पासबुक
- 03 चेकबुक
- 01 एटीएम कार्ड
- 09 खुरचे हुए सिमकार्ड
- 01 UAE पहचान पत्र
- 01 दुबई का सिम
- अन्य व्यक्ति का पैन कार्ड एवं ड्राइविंग लाइसेंस
- 01 मोबाइल चार्जर
- ₹59,500 नकद
अमृतपाल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसके दो अन्य साथियों—
- धर्मेन्द्र कुमार पुत्र छंगेलाल, निवासी ग्राम उदरहा, थाना घुंघचाई
- प्रियांशु दीक्षित पुत्र मैकूलाल दीक्षित, निवासी ग्राम एवं थाना घुंघचाई
को भी गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
दुबई में सीखा ठगी का तरीका, लौटकर शुरू किया फर्जी कॉल सेंटर
पूछताछ में गिरोह के सरगना अमृतपाल सिंह ने बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि वह वर्ष 2024 में अपने एक साथी के साथ दुबई गया, जहां उसे एक कॉल सेंटर में ₹35,000 प्रति माह की नौकरी मिली। वहीं उसने लोगों को ठगने के तरीके सीखे।
काम सीखने के बाद वे दोनों बिना अनुमति के दुबई से वापस भारत आ गए और यहां आकर घर से ही फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने लगे।
गेमिंग ऐप के नाम पर चल रही थी ठगी
यह गिरोह लोगों को फोन कर एविएटर, रम्मी जैसे गेमिंग एप्स पर गेम खेलने के लिए प्रेरित करता था।
इनका ठगी का तरीका इस प्रकार था—
- शुरुआत में व्यक्ति को उच्च दरों से जीत दिलाते थे
- उसके खाते में कमाई का पैसा भेजकर भरोसा जीतते थे
- इसी प्रक्रिया में पीड़ित के बैंक विवरण, यूपीआई व अकाउंट डिटेल हासिल कर लेते थे
- कुछ समय बाद पीड़ित का पूरा बैंक खाता खाली कर देते थे
गैंग डार्क वेब से इच्छुक व्यक्तियों के मोबाइल नंबर व विवरण खरीदते थे और फिर उन्हें लगातार कॉल करके गेम खेलने का आदी बना देते थे।
आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क, बाकी सदस्यों और लेन-देन की पूरी जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

