(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। राष्ट्रीय बाघ गणना 2026 को लेकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को मुस्तफाबाद स्थित प्रशिक्षण केंद्र में हुआ। पीलीभीत टाइगर रिजर्व को इस बार बाघ गणना प्रशिक्षण का नोडल केंद्र बनाया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह तथा सामाजिक वानिकी प्रभाग के डीएफओ भरत कुमार डीके ने की।
पांच वन प्रभागों के अफसरों को दी गई बारीकी प्रशिक्षण
पहले दिन महोफ रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी सहेंद्र यादव ने प्रशिक्षक के रूप में बाघ गणना से जुड़ी सभी तकनीकी बारीकियां और सावधानियां विस्तार से समझाईं। प्रशिक्षण में शिवालिक, शाहजहांपुर, बिजनौर, नजीबाबाद एवं सामाजिक वानिकी प्रभाग पीलीभीत के वन अफसरों ने प्रतिभाग किया।
पेपरलेस टाइगर काउंटिंग : एम-स्ट्राइप एप से होगी निगरानी
प्रशिक्षण में बताया गया कि इस बार बाघ गणना पूरी तरह पेपरलेस रहेगी। इसके लिए एम-स्ट्राइप इकोलॉजिकल एप (M-STRiPES) का उपयोग किया जाएगा।अधिकारियों को समझाया गया कि एप में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष साक्ष्य, पगमार्क, विष्ठा, शिकार अवशेष आदि दर्ज किए जाएंगे।फोटो अपलोड करते समय जीपीएस लोकेशन भी साथ भेजनी होगी, ताकि स्थल की सटीक पहचान हो सके।सभी डेटा मानकों के अनुसार दर्ज करना अनिवार्य है, जिससे अंतिम गणना में त्रुटि की गुंजाइश न रहे।
सटीक डेटा ही बाघ संरक्षण की नींव : डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि
राष्ट्रीय बाघ गणना में सटीक आंकड़े ही बाघ संरक्षण की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, इसलिए सभी निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है।”उन्होंने डेटा एंट्री से लेकर फील्ड ट्रैकिंग तक प्रत्येक चरण को गंभीरता से अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन 6 दिसंबर
डिप्टी डायरेक्टर के अनुसार दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार 6 दिसंबर को होगा। इसके बाद सभी वन विभागों की टीमें अपने-अपने प्रभागों में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार बाघ गणना की तैयारियों को अंतिम रूप देंगी।

