(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध जिला चिकित्सालय, पीलीभीत की इन्स्टिट्यूशनल एथिक्स कमेटी (IEC) की बैठक आज आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों से प्राप्त शोध प्रस्तावों का परीक्षण करते हुए उनके वैज्ञानिक पक्ष, नैतिक मानकों तथा प्रतिभागियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में समिति के सदस्य डॉ. प्रेम चन्द्र श्रीवास्तव (मेंबर सेक्रेटरी), डॉ. जगदम्बा शरण, डॉ. अरुण सिंह, डॉ. शिखा सक्सेना एवं डॉ. विभूति गोयल उपस्थित रहे। समिति ने सभी प्रस्तावों की गहन समीक्षा करते हुए आवश्यक सुझाव भी प्रदान किए।
इन शोध प्रस्तावों पर हुई चर्चा
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की शोधकर्ता डॉ. दीपिका वर्मा एवं डॉ. प्रियंका चतुर्वेदी के अध्ययन “तृतीयक देखभाल अस्पताल में ग्राम-नेगेटिव जीवाणुओं में एम्प C बीटा-लैक्टामेज की प्रचलनता” पर विचार किया गया। वहीं एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अरविंद एम. के दो प्रस्ताव—पीसीएनएल सर्जरी में रक्तस्राव के अनुमान तथा कम-खुराक व पारंपरिक खुराक स्पाइनल एनेस्थीसिया की तुलना—पर भी विस्तार से विमर्श हुआ।
समिति ने सभी प्रस्तावों की कार्यप्रणाली, सामुदायिक उपयोगिता और नैतिक पक्षों का मूल्यांकन करते हुए संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी एवं उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने पर बल दिया।
प्राचार्या का संदेश
इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान किसी भी संस्थान की प्रगतिशीलता का आधार होता है। उन्होंने इन्स्टिट्यूशनल एथिक्स कमेटी के प्रयासों की सराहना करते हुए आश्वस्त किया कि संस्थान भविष्य में भी वैज्ञानिक दृष्टि से सुदृढ़ एवं नैतिक मानकों पर आधारित अनुसंधान को पूरा सहयोग देता रहेगा।

