रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध अस्पताल ने उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जिले में पहली बार आईसीयू में मरीज के बेडसाइड पर कॉन्टिन्युअस एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस प्रक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न की है। इस सफलता ने गंभीर मरीजों के उपचार में संस्थान की विशेषज्ञता और क्षमता को नई पहचान दी है।
विषाक्त पदार्थ सेवन के बाद बिगड़ी हालत
अस्पताल प्रशासन के अनुसार 30 वर्षीय एक युवक को विषाक्त पदार्थ के सेवन के बाद अत्यंत गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान मरीज को एक्यूट किडनी इंजरी (स्टेज-3) हो गई। उसकी जांच में क्रिएटिनिन 6 एमजी/डीएल और यूरिया 110 एमजी/डीएल पाया गया। मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करना जानलेवा साबित हो सकता था।
ICU टीम ने लिया त्वरित फैसला
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईसीयू इंचार्ज डॉ. अरविंद एम के नेतृत्व में टीम ने बेडसाइड CAPD शुरू करने का निर्णय लिया। डॉ. अरविंद एम ने स्वयं मरीज के बेडसाइड पर कैथेटर स्थापित कर प्रक्रिया शुरू कराई। इससे बिना समय गंवाए और बिना मरीज को स्थानांतरित किए तत्काल उपचार शुरू हो सका।
CAPD क्यों बना बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति में CAPD इसलिए चुना गया क्योंकि इससे मरीज के रक्तचाप में अचानक गिरावट का खतरा कम रहता है। मरीज को दूसरे केंद्र ले जाने का जोखिम समाप्त हो गया। साथ ही शरीर से विषैले तत्वों और अतिरिक्त द्रव का लगातार निष्कासन संभव हुआ, जिससे उपचार अधिक प्रभावी साबित हुआ।
प्राचार्या ने टीम को दी बधाई
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह पीलीभीत जनपद के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने डॉ. अरविंद एम और उनकी पूरी आईसीयू टीम को बधाई देते हुए कहा कि जटिल और जीवनरक्षक उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिकता है, ताकि मरीजों को दूर-दराज के केंद्रों पर न जाना पड़े।
मरीज की हालत में सुधार
अस्पताल सूत्रों के अनुसार मरीज फिलहाल आईसीयू टीम की 24 घंटे निगरानी में है और उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिसाल
मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर है। इससे साबित हुआ है कि सक्षम नेतृत्व, विशेषज्ञता और समर्पित टीमवर्क के दम पर उच्च स्तरीय तृतीयक चिकित्सा सेवाएं भी स्थानीय स्तर पर सफलतापूर्वक उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

