शारदा सागर बांध में मछली शिकार की नीलामी पर वन विभाग की आपत्ति,नीलामी निरस्त करने को लेकर लिखा पत्र,

Share Also

रिंटू वर्मा…

पीलीभीत।शारदा सागर बांध में मछली के शिकार के लिए की गई नीलामी को लेकर वन विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी  मनीष सिंह ने शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर वर्ष 2026-27 के लिए बांध के किलोमीटर 7.500 पर स्थित स्केप में मछली शिकार की नीलामी निरस्त करने की मांग की है। वन विभाग का तर्क है कि जलाशय में मछलियों का शिकार होने से मगरमच्छों के भोजन पर संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही संरक्षित कछुओं के अवैध शिकार की आशंका बढ़ने और प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा है। विभाग ने इसे वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए नीलामी रद्द करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

नीलामी की अवधि 30 जून 2027 तक

डीएफओ मनीष सिंह की ओर से 14 अक्टूबर  को जारी पत्र के अनुसार, शारदा सागर बांध के किलोमीटर 7.500 पर स्थित स्केप में मछली शिकार के लिए शिवकर बछाड़ पुत्र सर्वेद बछाड़, निवासी ग्राम ढकिया, तहसील कलीनगर, थाना माधोटांडा, जिला पीलीभीत के नाम नीलामी की गई है। इसकी अवधि 30 जून 2027 तक निर्धारित है। वन विभाग ने संबंधित नीलामी को निरस्त कराने के लिए अधिशासी अभियंता शारदा सागर खंड को पत्र भेजा है।

मगरमच्छों के भोजन पर पड़ सकता है असर

पत्र में बताया गया है कि शारदा सागर बांध का कुछ हिस्सा पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, जबकि शेष भाग रिजर्व से सटा हुआ है। जलाशय में मगरमच्छ, विभिन्न प्रजातियों के कछुए और अन्य जलीय जीव पाए जाते हैं। इनमें कई वन्यजीव वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं।

वन विभाग के मुताबिक, जलाशय में मौजूद मछलियां मगरमच्छों के भोजन का प्रमुख स्रोत हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर मछली शिकार होने से मगरमच्छों के सामने भोजन की कमी हो सकती है। भोजन की तलाश में उनके आबादी वाले क्षेत्रों की ओर जाने की आशंका भी जताई गई है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मछली पकड़ने की गतिविधियों की आड़ में कछुओं के अवैध शिकार की आशंका भी विभाग ने व्यक्त की है।

प्रवासी पक्षियों के प्रमुख ठिकाने पर भी खतरा

शारदा सागर जलाशय हर साल नवंबर से फरवरी के बीच प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास बनता है। विभिन्न देशों से आने वाले पक्षी यहां तीन से चार महीने तक प्रवास करते हैं। पत्र में कहा गया है कि प्रवास के दौरान कई पक्षी भोजन के लिए मछलियों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में मछलियों का शिकार होने से पक्षियों के लिए भोजन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और उनके प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ सकता है।

वन विभाग ने यह आशंका भी जताई है कि मछली शिकार के लिए जलाशय में आने वाले लोगों द्वारा प्रवासी पक्षियों का शिकार किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे जैव विविधता और पक्षियों के संरक्षण के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय संधि का भी दिया हवाला

डीएफओ ने अपने पत्र में प्रवासी वन्यजीवों के संरक्षण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौते कन्वेंशन ऑन द कंजर्वेशन ऑफ माइग्रेटरी स्पीशीज ऑफ वाइल्ड एनिमल्स का भी उल्लेख किया है। इसे बॉन कन्वेंशन के नाम से भी जाना जाता है। पत्र के अनुसार, भारत इस समझौते का पक्षकार है और प्रवासी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उनके प्रवास मार्गों तथा प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

वन विभाग का कहना है कि शारदा सागर जलाशय में मछलियों की उपलब्धता प्रवासी पक्षियों के लिए भी अहम है। इसलिए यहां मछली शिकार की नीलामी से वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नीलामी निरस्त करने के लिए कार्रवाई की मांग

डीएफओ मनीष सिंह ने इन सभी बिंदुओं का हवाला देते हुए अधिशासी अभियंता शारदा सागर खंड, पीलीभीत से नीलामी निरस्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।


Share Also

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *