पीलीभीत: जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन बाइक चालकों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही। जनवरी से सितंबर तक तीन हजार से अधिक चालान काटे जा चुके हैं और 75 से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। जागरूकता कार्यक्रमों में नियमों की जानकारी दी जाती है, फिर भी शहर के प्रमुख चौराहों पर गुजरने वाले 100 बाइक चालकों में महज 35 से 40 ही हेलमेट लगाए नजर आते हैं। हेलमेट की अनदेखी कर चालक फर्राटेदार रफ्तार भर रहे हैं, जिससे सड़क हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। परिवहन विभाग बाइक चालकों को हेलमेट उपयोग की सीख देने के लिए विशेष अभियान चलाता है। नियमों की अवहेलना पर चालान काटा जाता है और बाइक जब्त की जाती है। अगर किसी चालक पर लगातार पांच या इससे अधिक चालान हो जाते हैं, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिया जाता है। निलंबन की अवधि तीन माह होती है, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया से गुजरकर ही लाइसेंस बहाल होता है। पुलिस और यातायात पुलिस भी चालान व बाइक सीज करने में सक्रिय हैं, लेकिन इन सबके बावजूद चालक अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
चौराहों पर निगरानी: हेलमेट पहनने वालों की संख्या निराशाजनक
शहर के व्यस्त चौराहों पर की गई निगरानी चौंकाने वाली तस्वीर पेश करती है। मंगलवार दोपहर नकटादाना चौराहे पर महज आधे घंटे में 100 से अधिक बाइक चालक गुजरे, लेकिन इनमें से बमुश्किल 30 ने ही हेलमेट लगाया था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जागरूकता के बावजूद लोग गंभीर नहीं हैं। परिवहन विभाग प्रतिमाह हेलमेट अनदेखी पर 500 से अधिक चालान करता है, जो कभी-कभी 700 के पार भी चला जाता है। पुलिस और यातायात पुलिस भी करीब इतने ही चालान काटती है। नवंबर में यातायात माह होने के कारण यह संख्या और बढ़ जाती है। एआरटीओ वीरेंद्र सिंह का कहना है कि नियमों का पालन कराने के लिए लगातार कार्रवाई हो रही है। बार-बार चालान होने पर लाइसेंस निलंबित किया जा रहा है, ताकि लोग सबक लें। फिर भी, खुद की जान जोखिम में डालकर चालक हेलमेट के बिना सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं।
लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया: तीन माह तक वाहन चलाना वर्जित
लाइसेंस निलंबन एक सख्त कदम है, जो बार-बार उल्लंघन करने वालों पर लागू होता है। अगर एक ही लाइसेंस पर लगातार चालान कटते हैं, तो विभाग इसे निलंबित कर देता है। निलंबन के दौरान चालक तीन माह तक कोई वाहन नहीं चला सकता। इसके बाद आवेदन देकर और पूरी प्रक्रिया पूरी कर वह लाइसेंस बहाल करा सकता है। यह नियम चालकों को अनुशासन में लाने के लिए बनाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कम दिख रहा है। लोग नियमों को हल्के में ले रहे हैं, जिससे हादसों में कमी नहीं आ रही। परिवहन विभाग का मानना है कि सजा का डर ही लोगों को जिम्मेदार बना सकता है, इसलिए निलंबन जैसी कार्रवाई जरूरी है।
जनवरी से सितंबर तक हादसों का भयावह आंकड़ा
सड़क हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जनवरी से सितंबर तक कुल दुर्घटनाएं, मृतक और घायल की संख्या इस प्रकार है:
- जनवरी: 51 दुर्घटनाएं, 25 मृतक, 34 घायल
- फरवरी: 42 दुर्घटनाएं, 16 मृतक, 32 घायल
- मई: 52 दुर्घटनाएं, 35 मृतक, 35 घायल (सबसे अधिक मृतक)
- अगस्त: 44 दुर्घटनाएं, 30 मृतक, 42 घायल (सबसे अधिक घायल)
इन नौ महीनों में कुल दुर्घटनाएं 346 से अधिक रही हैं, जिसमें 205 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 255 से अधिक घायल हुए। मई और अगस्त सबसे खतरनाक महीने रहे। हेलमेट न पहनने से सिर पर चोट लगने के मामले अधिक हैं, जो मौत का प्रमुख कारण बनते हैं।
जागरूकता की जरूरत: सुरक्षा पहले, जुर्माना बाद
पीलीभीत में सड़क सुरक्षा अभियान तेज हैं, लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब चालक खुद जागरूक होंगे। हेलमेट सिर्फ नियम नहीं, जीवन रक्षक है। विभाग और पुलिस की कार्रवाई से डरकर नहीं, बल्कि समझकर नियम मानने की आदत डालनी होगी। स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां हेलमेट के फायदे बताए जाते हैं। फिर भी, युवा चालक फैशन या असुविधा का हवाला देकर अनदेखी करते हैं। अगर यही रवैया रहा, तो चालान और निलंबन की संख्या बढ़ेगी, लेकिन हादसे नहीं रुकेंगे। एआरटीओ का आह्वान है कि हर चालक हेलमेट को अपनी सुरक्षा का हिस्सा बनाए। पुलिस भी चौक-चौराहों पर सघन चेकिंग कर रही है। नवंबर यातायात माह में विशेष ड्राइव चलाई जाएगी।
निष्कर्ष: बदलाव की जिम्मेदारी सभी की
पीलीभीत की सड़कें सुरक्षित तभी होंगी, जब हर बाइक चालक हेलमेट को अनिवार्य माने। 3000 चालान और 75 निलंबन चेतावनी हैं, लेकिन असली बदलाव मन से आएगा। परिवार, समाज और प्रशासन मिलकर जागरूकता फैलाएं। हादसों के आंकड़े कम करने का एकमात्र तरीका है – हेलमेट पहनो, सुरक्षित रहो।


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