(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत।उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के व्यापारियों ने विद्युत विभाग से जुड़ी जटिल एवं लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मुख्यमंत्री संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर को सौंपा गया है।ज्ञापन में व्यापारियों ने आरोप लगाया कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था, बिलिंग प्रणाली, जांच प्रक्रिया एवं पुराने विच्छेदित कनेक्शनों के नाम पर विद्युत विभाग द्वारा मनमानी वसूली की जा रही है, जिससे व्यापारी वर्ग आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है।
प्रीपेड मीटर और बिलिंग व्यवस्था पर प्रमुख मांगें
व्यापारियों ने मांग की कि प्रीपेड मीटर लगाए जाने से पूर्व उपभोक्ताओं से ली गई सिक्योरिटी राशि तत्काल वापस की जाए, क्योंकि प्रीपेड व्यवस्था में उधार बिजली का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
साथ ही, प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद फिक्स चार्ज, मिनिमम चार्ज और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी समाप्त कर केवल वास्तविक उपभोग की गई यूनिट के आधार पर ही बिलिंग किए जाने की मांग उठाई गई।
बंद पड़े मकानों या उपयोग में न आने वाले कनेक्शनों पर मिनिमम और फिक्स चार्ज पूर्णतः समाप्त किए जाने की भी मांग की गई।
मीटर गुणवत्ता, जांच और पारदर्शिता की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि मीटर लगाने से पूर्व तथा उसके बाद प्रतिवर्ष लीगल मेट्रोलॉजी विभाग से अनिवार्य जांच कराई जाए और मीटर की सटीकता की जिम्मेदारी विद्युत विभाग की हो।
मीटर लगाते समय उपभोक्ता को मीटर का मैनुअल और वारंटी कार्ड अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए।
मीटर लगाते या उतारते समय मौके पर ही सीलिंग सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सके।
बिजली कटौती, शिकायत और कार्यालयी प्रक्रियाएं
व्यापारियों ने मांग की कि बिजली कटौती का रोस्टर सार्वजनिक किया जाए और अघोषित कटौती पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालय में दिए गए प्रत्येक प्रार्थनापत्र की रिसीविंग अनिवार्य की जाए।
बिजली आपूर्ति या बिल सुधार से संबंधित शिकायत दर्ज करने पर शिकायत पर्ची बनाकर उसकी प्रति उपभोक्ता को दी जाए।
जांच, बिलिंग और सौर ऊर्जा से जुड़ी समस्याएं
मीटर बदलने के बाद लैब जांच समय पर कराई जाए तथा जांच की तिथि और समय की जानकारी उपभोक्ता को दी जाए, जिससे एकतरफा कार्रवाई और एफआईआर की धमकी देकर किए जाने वाले शोषण पर रोक लग सके।
औद्योगिक उपभोक्ताओं के पोर्टल और बिल में दर्शाई गई राशि के अंतर को समाप्त किया जाए।
सौर ऊर्जा (नेट मीटरिंग) उपभोक्ताओं को रीडिंग कम करवाने के लिए परेशान न किया जाए तथा अधिशेष ऊर्जा का भुगतान सॉफ्टवेयर सुधार के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
विच्छेदन, एरियर और ओटीएस से जुड़ी मांगें
25–30 वर्ष पुराने पी.डी. कनेक्शनों पर बिना सीलिंग प्रमाण पत्र या विच्छेदन तिथि के आरसी जारी किए जाने को अवैध बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की गई।
पी.डी. की स्थिति में स्थायी विच्छेदन तिथि से ही फाइनल बिल बनाए जाने तथा सिक्योरिटी राशि का समायोजन कर ही बिल देने की मांग रखी गई।
व्यापारियों ने ओटीएस योजना का दायरा बढ़ाकर सभी औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू करने की भी मांग की।
लाइन लॉस और अधिकारियों की जवाबदेही
मानक से अधिक लाइन लॉस वाले फीडरों पर संबंधित उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा गया कि लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं से वसूली के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

