(रिंटू वर्मा )
पीलीभीत। विश्व महिला चिकित्सक दिवस के अवसर पर स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत की विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्राचार्य ने महिला चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उनके योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में महिला डॉक्टरों ने न केवल पेशेवर दक्षता का उत्कृष्ट परिचय दिया है, बल्कि करुणा, संवेदना और समर्पण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को मानवीय स्वरूप प्रदान किया है।
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का सन्देश:-
डॉ अर्चना सिंह का वक्तव्य
शरीर रचना विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि आज महिलाएँ चिकित्सा शिक्षा, शोध, नैदानिक सेवाओं और प्रशासनिक दायित्वों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। चुनौतियों के बावजूद उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई हैं।
डॉ श्रेयशी वक्श का वक्तव्य
शरीर क्रिया विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. श्रेयशी वक्श ने बताया कि मूलभूत विषयों में महिला शिक्षिकाओं एवं चिकित्सकों का योगदान चिकित्सा शिक्षा की नींव को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि समान अवसर और सहयोगी वातावरण से महिला चिकित्सकों की क्षमता और अधिक सशक्त हो सकती है।
डॉ शिखा सक्सेना का वक्तव्य
जैव रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सक्सेना ने कहा कि बायोकेमिस्ट्री जैसे आधारभूत विषय में महिलाओं की भागीदारी ने रोगों की समझ, निदान और उपचार की वैज्ञानिक दृष्टि को मजबूत किया है।
डॉ दीपिका का वक्तव्य
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपिका वर्मा ने कहा कि संक्रमण नियंत्रण, सटीक निदान और जनस्वास्थ्य संरक्षण में महिला चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप सहित प्रयोगशाला सेवाओं में महिलाओं के योगदान को भी रेखांकित किया।
डॉ विभूति गोयल का वक्तव्य
“विश्व महिला चिकित्सक दिवस के अवसर पर मैं समस्त महिला चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं सम्मान प्रकट करती हूँ। पैथोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की रीढ़ है, और इस क्षेत्र में महिला चिकित्सकों का योगदान रोगों के सटीक निदान, उपचार की दिशा निर्धारण तथा रोगी देखभाल में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
महिला पैथोलॉजिस्ट्स ने शिक्षण, अनुसंधान और आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों के माध्यम से गुणवत्ता-पूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया है। उनकी कार्यकुशलता, सूक्ष्म अवलोकन क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने चिकित्सा प्रणाली को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाया है।
यह दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि महिला चिकित्सकों को समान अवसर, सम्मानजनक कार्य वातावरण और नेतृत्व की भूमिका प्रदान करना न केवल आवश्यक है, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र की प्रगति के लिए अनिवार्य भी है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में महिला चिकित्सक चिकित्सा विज्ञान में नए मानक स्थापित करती रहेंगी।”
डॉ रूपल खरे का वक्तव्य
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूपल खरे ने कहा कि महिला चिकित्सकों ने सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसूति सेवाओं तथा महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर अनगिनत माताओं और शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाया है।
मेडिकल कॉलेज पीलीभीत की प्राचार्या डॉ संगीता अनेजा का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि महिला चिकित्सक चिकित्सा सेवा की सशक्त धुरी हैं। उन्होंने बताया कि स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत एवं संबद्ध जिला अस्पताल में हाल के वर्षों में हुई प्रगति—चाहे वह शैक्षणिक गुणवत्ता हो, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ हों या जनसेवा उसमें महिला चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी का अहम योगदान रहा है।
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह दिवस महिला चिकित्सकों को समान अवसर, सम्मानजनक कार्य वातावरण और नेतृत्व की पर्याप्त संभावनाएँ प्रदान करने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। साथ ही विश्वास जताया गया कि आने वाले समय में महिला चिकित्सक चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, जनस्वास्थ्य तथा समाज कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करती रहेंगी।

