(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर पीलीभीत स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में कैंसर की समय पर पहचान और उपचार को लेकर की जा रही पहल सामने आई है। जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 की अवधि में महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग द्वारा कैंसर पहचान हेतु व्यापक स्तर पर जांच कार्य किया गया।
इस अवधि में हिस्टोपैथोलॉजी के कुल 143 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 8 नमूने कैंसर पॉजिटिव पाए गए। इनमें 3 मामले सर्वाइकल कैंसर तथा 5 मामले ओरल कैंसर के रहे।
स्तन व रक्त कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग
पीलीभीत महाविद्यालय में स्तन कैंसर की जांच हेतु प्रतिवर्ष लगभग 3600 नमूने लिए जाते हैं, जिनमें औसतन 144 नमूने पॉजिटिव पाए जाते हैं। वहीं रक्त कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए एसआई/बीआई/सीबीसी के अंतर्गत प्रतिवर्ष करीब 36 हजार रक्त नमूनों की जांच की जाती है, जिनमें औसतन 12 मामले चिन्हित होते हैं।
“समय पर निदान से बढ़ रही उपचार सफलता दर” — डॉ विभूति गोयल विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ विभूति गोयल ने बताया कि महाविद्यालय में उपलब्ध आधुनिक पैथोलॉजी सुविधाओं, प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ तथा मानकीकृत प्रक्रियाओं के माध्यम से कैंसर की प्रारंभिक एवं सटीक पहचान संभव हो रही है। उन्होंने कहा कि समय पर निदान से रोगियों के उपचार की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
“भविष्य में सेवाओं का और होगा विस्तार” — प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा
पीलीभीत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय पीलीभीत का उद्देश्य जनपद एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता की सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की शीघ्र पहचान और उपचार में पैथोलॉजी विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन सेवाओं को और अधिक विस्तारित किया जाएगा।
महाविद्यालय प्रशासन कैंसर के प्रति जन-जागरूकता, समय पर जांच एवं उपचार को प्राथमिकता देते हुए निरंतर जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध है।

विश्व कैंसर दिवस पर विभागाध्यक्ष, बायोकेमिस्ट्री विभाग डॉ. शिखा सक्सेना का वक्तव्य
पीलीभीत। डॉ शिखा सक्सेना के अनुसार विश्व कैंसर दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि कैंसर की रोकथाम, शीघ्र पहचान और उपचार में बायोकेमिस्ट्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शरीर में होने वाले जैव-रासायनिक परिवर्तनों को समझकर हम कैंसर के जोखिम, उसकी प्रगति और उपचार की प्रतिक्रिया का आकलन कर सकते हैं।
बायोकेमिस्ट्री के अंतर्गत ट्यूमर मार्कर्स, हार्मोनल प्रोफाइल, मेटाबॉलिक बदलाव तथा अन्य प्रयोगशाला जांचें कैंसर के निदान, निगरानी और फॉलो-अप में सहायक होती हैं। ये जांचें न केवल रोग की पुष्टि में मदद करती हैं, बल्कि उपचार की प्रभावशीलता और रोग की पुनरावृत्ति की समय पर पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर मैं यह कहना चाहूँगी कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली कैंसर की रोकथाम में सहायक हैं। साथ ही, वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित जांचों के प्रति जनविश्वास बढ़ाना भी आवश्यक है।
विश्व कैंसर दिवस पर हम सभी का यह संकल्प होना चाहिए कि हम विज्ञान, जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से कैंसर के विरुद्ध इस लड़ाई को और अधिक सशक्त बनाएँ तथा समाज को स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर करें।
शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जगदम्बा शरण का संदेश
“कैंसर केवल रोग नहीं, सामाजिक चुनौती भी”
विश्व कैंसर दिवस पर शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जगदम्बा शरण ने कहा कि कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती है, जिसका सामना सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक अवस्था में कैंसर का निदान होने पर शल्य चिकित्सा द्वारा रोगमुक्ति की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।
उन्होंने आमजन से तंबाकू और शराब से दूर रहने, संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। साथ ही कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक कैंसर के प्रति जागरूकता पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूपल खरे का आह्वान
“महिलाएं नियमित जांच को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा”
डॉ. रूपल खरे ने कहा कि महिलाओं में होने वाले कैंसर—जैसे सर्वाइकल, स्तन और ओवेरियन कैंसर—यदि प्रारंभिक अवस्था में पहचान लिए जाएं तो इनका उपचार अधिक सफल होता है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा पैप स्मीयर जांच, स्तन स्व-परीक्षण और नियमित चिकित्सकीय परामर्श के लिए महिलाओं को लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें तथा नियमित जांच कराएं। साथ ही परिवार और समाज से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों में सहयोग देने का आग्रह किया।
सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण सिंह
“स्वस्थ जीवनशैली से रोके जा सकते हैं अनेक कैंसर”
उप प्राचार्य डॉ. अरुण सिंह ने कहा कि कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और समुचित उपचार से इस बीमारी के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता और पर्यावरणीय कारक कैंसर के प्रमुख कारण हैं।
सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा जन-जागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक कैंसर से बचाव की जानकारी और सुविधाएं पहुंच सकें।
उन्होंने सभी से अपील की कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, नियमित जांच को बढ़ावा दें और समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाकर एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें।

