( रिंटू वर्मा )
पीलीभीत।उत्तरप्रदेश के पीलीभीत जनपद की राशन कार्डधारक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शासन के निर्देश पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दो लाख से अधिक पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय कार्डधारक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं को उनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, साथ ही सरकारी अनुदान उपलब्ध कराकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पीलीभीत जनपद मे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर डेयरी, कृषि एवं गैर-कृषि गतिविधियों में आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगी।
जनपद में 12,800 से अधिक स्वयं सहायता समूह, 1.30 लाख महिलाएं पहले से जुड़ी
जनपद में अब तक 12,800 से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिनसे करीब 1.30 लाख महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न चरणों में फंड उपलब्ध कराकर लघु उद्योग, डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, कृषि आधारित कार्य सहित अन्य स्वरोजगार गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है
दो लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य, ब्लॉक स्तर पर शुरू हुई कवायद
अब शासन द्वारा अधिक संख्या में महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनपद में कुल 3,37,104 राशन कार्ड हैं, जिनमें 3,60,449 पात्र गृहस्थी और 36,655 अंत्योदय कार्ड शामिल हैं। इनमें लगभग 97 प्रतिशत कार्ड महिलाओं के नाम से पंजीकृत हैं। लक्ष्य को पूरा करने के लिए ब्लॉक, न्याय पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बैठकों का दौर शुरू कर दिया गया है।
“जनपद में दो लाख से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने की योजना है। इसको लेकर ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। शीघ्र ही लक्ष्य निर्धारित कर नए समूहों का गठन कराया जाएगा। उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।”
— वंदना सिंह, उपायुक्त,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पीलीभीत

