बेडसाइड अल्ट्रासाउंड से आईसीयू सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव…स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत में गहन चिकित्सा प्रबंधन को मिली नई दिशा

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पीलीभीत। क्षेत्र में गहन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम के नेतृत्व में पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड को रोगी प्रबंधन का अभिन्न अंग बना दिया गया है।

अब जांच की सुविधा रेडियोलॉजी विभाग तक सीमित न रहकर सीधे मरीज के बेडसाइड पर उपलब्ध हो गई है, जिससे उपचार की गति और सटीकता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

आईसीयू में 24×7 समर्पित अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा

गहन चिकित्सा के लिए विशेष रूप से समर्पित अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन चौबीसों घंटे उपलब्ध है। इसमें विभिन्न क्लिनिकल आवश्यकताओं हेतु विशेष प्रोब्स लगाए गए हैं—

  • लिनियर प्रोब: सतही संरचनाओं एवं रक्त वाहिकाओं की उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग तथा अल्ट्रासाउंड-गाइडेड कैन्यूलेशन के लिए।
  • कर्विलीनियर प्रोब: गहरे एब्डॉमिनल स्कैन एवं पर्क्यूटेनियस नेफ्रोस्टोमी (PCN) जैसी प्रक्रियाओं के लिए।
  • फेज्ड एरे प्रोब: त्वरित कार्डियक इको और रियल-टाइम हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग हेतु।
  • बेडसाइड पर सटीकता, सुरक्षा और त्वरित निर्णय

POCUS के प्रभावी क्रियान्वयन से कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में तेजी और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है—

  • हृदय एवं श्वसन मूल्यांकन: बेडसाइड इको एवं लंग अल्ट्रासाउंड से हृदय विफलता और निमोनिया के बीच त्वरित अंतर संभव।
  • आपातकालीन ट्रॉमा प्रबंधन: ई-फास्ट (E-FAST) जांच के माध्यम से आंतरिक रक्तस्राव और हेमोथोरैक्स की शीघ्र पहचान।
  • वैस्कुलर सुरक्षा: आईजेवी (IJV) थ्रॉम्बोसिस की स्क्रीनिंग एवं अल्ट्रासाउंड-गाइडेड वेनस कैन्यूलेशन से सेंट्रल लाइन की सुरक्षित स्थापना, जिससे जटिलताओं का जोखिम कम हुआ।
  • उन्नत हस्तक्षेप: पीसीएन जैसी जटिल प्रक्रियाएं अब बेडसाइड अधिक सुरक्षित रूप से संपन्न।
  • डायनेमिक फ्लूड मैनेजमेंट: पारंपरिक “स्टैटिक” विधियों के स्थान पर रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड आधारित मूल्यांकन से अधिक सटीक तरल प्रबंधन।
  • देखभाल का नया मानक’ – डॉ. अरविंद एम

आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम ने बताया कि POCUS के समावेशन से न केवल रोगी सुरक्षा में वृद्धि हुई है, बल्कि उपचार प्रारंभ करने में लगने वाला समय भी काफी कम हुआ है।उन्होंने कहा,

“POCUS अब केवल एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि गंभीर रोगियों की हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम बन चुका है। समर्पित मशीन एवं बहुविकल्पीय प्रोब्स के माध्यम से हम पीलीभीत को आधुनिक गहन चिकित्सा सेवाओं में अग्रणी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के नेतृत्व में तकनीकी उन्नयन

यह उपलब्धि महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के प्रशासनिक सहयोग एवं दूरदर्शी नेतृत्व से संभव हो सकी है। उनके मार्गदर्शन में चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों में आधुनिक तकनीकों का समावेशन निरंतर जारी है।

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत द्वारा आधारभूत संरचना के सतत उन्नयन की दिशा में उठाया गया यह कदम क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और नैदानिक दक्षता के उत्कृष्ट समन्वय का प्रतीक है।


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