रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मे सरकारी धन के गबन के मामले में फरार चल रही अभियुक्ता अर्शी खातून को पुलिस की थाना कोतवाली पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे उसके निवास स्थान मोहल्ला पंजाबियान से हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि मुख्य आरोपी उसके पति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। प्रभारी निरीक्षक सतेन्द्र कुमार के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। थाना कोतवाली में जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार की तहरीर पर 14 फरवरी को मुकदमा अपराध संख्या 60/26, विभिन्न धाराओं में पंजीकृत किया गया था।
फर्जी तरीके से पत्नी के खाते में ट्रांसफर कराए पैसे
जांच में सामने आया कि वर्ष 2025-26 की बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित धनराशि विद्यालयों के खातों में ऑनलाइन भेजी जानी थी। इसी दौरान जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज, बीसलपुर में कार्यरत तथा लंबे समय से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में संबद्ध इल्हाम उर्र रहमान शम्सी वेतन बिल टोकन जनरेशन समेत वित्तीय कार्य देख रहा था।आरोप है कि उसने फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पत्नी अर्शी खातून के बैंक ऑफ बड़ौदा मुख्य शाखा, पीलीभीत स्थित खाते को वेतन मद में गलत तरीके से बेनिफिशियरी बनाकर सरकारी धन का गबन कर लिया।
मुख्य आरोपी की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्ता से पूछताछ की जा रही है और उसके पति इल्हाम उर्र रहमान शम्सी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और विभागीय स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया जारी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
शासनादेश की अनदेखी पर भी उठे सवाल
पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में करीब 1.02 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया ।दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद अब जिला प्रशासन ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।वहीं शासनादेश में स्पष्ट व्यवस्था होने के बावजूद हुई इस वित्तीय अनियमितता ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार डी डी ओ पोर्टल पर एम्प्लोयी बेनिफिसियरी मास्टरफाइल का अपडेट आहरण एवं वितरण अधिकारी द्वारा स्वयं किया जाना अनिवार्य है। शासन ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डी डी ओ अपना लॉगिन आईडी, पासवर्ड एवं डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट किसी भी अधीनस्थ कर्मचारी को प्रयोग के लिए उपलब्ध नहीं कराएंगे।
शासनादेश के अनुसार बेनिफिसियरी मास्टर फ़ाइल को डी डी ओ द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों का विवरण फ्रीज हो जाता है, जिससे बिना अधिकृत प्रक्रिया के उसमें कोई बदलाव संभव नहीं होता।
शासन की ई-पेमेंट व्यवस्था के तहत प्रत्येक भुगतान से पूर्व बेनिफिसियरी और ट्रांसक्शन फ़ाइल को डी डी ओ द्वारा स्वयं अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। साथ ही भुगतान से पहले संबंधित बैंक खाता संख्या, नाम और आईएफएससी कोड का सत्यापन करना भी डी डी ओ की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट उल्लेख है कि यदि किसी फर्म, संस्था या व्यक्ति को भुगतान किया जाता है तो उसकी बेनिफिसियरी फ़ाइल और ट्रांसक्शन फ़ाइल की जांच और अनुमोदन का दायित्व भी डी डी ओ का ही होगा। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि के लिए कोषागार को जिम्मेदार नहीं माना जाएगा।
एक ही दिन मे भारी संख्या मे एक ही खाते मे इतनी बड़ी रकम भेजना एक जाँच का विषय है और एक बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
मुकदमा दर्ज, लेकिन जिम्मेदारी पर उठे सवाल
प्रकरण में प्रथम दृष्टया कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उसकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि जब बिना डी डी ओ की स्वीकृति के भुगतान संभव नहीं है, तो इतनी बड़ी धनराशि का भुगतान कैसे हो गया।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि DDO पोर्टल की गोपनीय आईडी और डिजिटल सिग्नेचर के बिना किसी भी भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती, जिससे जिम्मेदारी का दायरा केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं माना जा रहा है।
संभावना जताई जा रही है कि जांच के बाद इस मामले में अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली और शासनादेश के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में इस घोटाले के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन पाया जाता है और प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।

