एड. अंशुल गौरव सिंह…
पीलीभीत । जनपद के थाना जहानाबाद के हारून प्रकरण क़ो लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक मामले में गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने बंदी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है।
गिरफ्तारी प्रक्रिया को बताया अवैध
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 204/2026 (मो. हारून व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) की सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं अपनाई गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से रखी गई दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि 15 फरवरी 2026 को तैयार किया गया गिरफ्तारी मेमो, डीजीपी उत्तर प्रदेश द्वारा जारी परिपत्रों (25 जुलाई 2025 और 3 फरवरी 2026) के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। इस कारण गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड की पूरी प्रक्रिया कानून के विपरीत है।
राज्य पक्ष नहीं दे सका संतोषजनक जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर सरकारी अधिवक्ता (एजीए) याचिकाकर्ताओं की दलीलों का प्रभावी खंडन नहीं कर सके। इसके बाद अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को अवैध करार दिया।
पूर्व निर्णयों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय उमंग रस्तोगी बनाम राज्य (2026) तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसले मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025) का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया का पालन न किए जाने के कारण 15 फरवरी 2026 का गिरफ्तारी मेमो और उसी दिन पारित रिमांड आदेश अवैध हैं, इसलिए इन्हें निरस्त किया जाता है।
तत्काल रिहाई का आदेश
अदालत ने निर्देश दिया कि बंदी को तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के अनुपालन के लिए प्रमाणित प्रति का इंतजार भी आवश्यक नहीं होगा।
विवेचक पर कार्रवाई के निर्देश
कोर्ट ने पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि मामले के विवेचक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए और अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया जाए।
रिमांड मजिस्ट्रेट से भी मांगा स्पष्टीकरण
इसके साथ ही अदालत ने रिमांड मजिस्ट्रेट से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या उन्हें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के उक्त निर्णयों की जानकारी थी या नहीं।मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

